Wednesday, October 14, 2026
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अनुसूचित जनजाति क्षेत्र बचाओ आंदोलन में दिखा प्रभावित ग्रामीणों का आक्रोश …..ग्रामीणों की हुंकार अब खदान और उद्योग के लिए नहीं देंगे जमीन …. पर्यावरण प्रदूषण की भयावह और ग्लोबल वार्मिंग का दुष्परिणाम भुगत रहे ….. खदान खोल रहे लेकिन प्रभावितों को इसकी ABC की जानकारी नहीं …कैसे दे दें जमीन

 

 

गारे पेल्मा सेक्टर वन ओपन कॉस्ट माइंस के खिलाफ हजारों की संख्या में प्रभावित ग्रामीणों का उमड़ा हुजूम,

खदान और उद्योग की बहुलता अब बर्दाश्त के बाहर नहीं देंगे जमीन यह हमारा अधिकार,

रायगढ़। गारे पेल्मा सेक्टर वन ओपन कॉस्ट माइंस के खिलाफ बड़ी तादात में प्रभावित गांव के आदिवासी ग्रामीणों का हुजूम जिला मुख्यालय में देखने को मिला। कोयला प्रभावित गांव के लगभग 13 गांव से अधिक के आदिवासी ग्रामीणों का हुजूम अनुसूचित जनजाति क्षेत्र बचाओ आंदोलन के रूप में देखने को मिला।


कोयला प्रभावित गांव के ग्रामीणों के हक में आवाज बुलंद करते हुए एक स्वर में क्षेत्र में और माइंस और किसी भी प्रकार के नए खदान और कल कारखानों की स्थापना के खिलाफ में रहे। क्षेत्र में अनियंत्रित हो चुकी पर्यावरण प्रदूषण और बिगड़े ग्लोबल वार्मिंग के दुष्परिणाम भुगत रहे। इसलिए ग्राम सभा में प्रस्ताव कर क्षेत्र में और कोयला खदान नहीं खुलने की मांग करते हुए अनुसूची जनजाति क्षेत्र बचाने के लिए हजारों की संख्या में ग्रामीण महिला पुरुष जिला मुख्यालय पहुंचे थे।

 


ग्रामीणों द्वारा प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में कई बातों को भी रखा गया है। जिसमे कोयला खदान के खुलने से होने वाली दुष्परिणाम सहित प्रभावितों को तथ्य परक जानकारी का अभाव होना बताया गया है। ग्रामीणों के अनुसार पहली बात ये है कि खदान प्रभावित ग्रामीणों की जमीन लेने से लेकर मुआवजे और पुनर्वास नौकरी से लेकर निजी वन भूमि के प्रभाव क्षेत्र का दायरा क्या होगा किसी भी तरह की कोई जानकारी प्रभावितों को नहीं दी गई है। ऐसे से यह भी सवाल उठता है की क्या ग्रामीणों को अंधेरे में रखकर खदान खुलने की कार्रवाई की जा रही है। विस्थापन में कौन सा और किस तरह का नियम लागू होगा। विस्थापन का आदिवासी समुदाय पर क्या प्रभाव पड़ेगा। आदिवासी महिलाएं बच्चों मजदूर आदि वर्ग के लिए क्या योजना है बिना किसी जानकारी के जमीन कैसे दें यह भी उनका एक बड़ा सवाल सामने आया है।

फिलहाल आदिवासियों ने अपनी ताकत की हुंकार भरकर जिला मुख्यालय में अपनी धमक जता दिया है कि यदि उनकी मांगे नहीं मानी गई तो आगे आदिवासी समाज अपने अधिकारों की रक्षा के लिए उग्र आंदोलन भी कर सकता है।

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