मुझको क्या ख़बर कि मैं कौन हूं?
मुझको क्या ख़बर कि मैं कौन हूं?
इसलिए तो आज हुआ मैं मौन हूं।
ये जाति ये रंग और नस्ल का भेद।
इस पर मुझको कहां होता है खेद।
दुनियावी कशमकश में चैन कहां?
हो ख़ुद से मुलाक़ात वक्त है कहां?
हो फ़ायदा सबको कर चलें पुकार।
राहगुज़र में उसकी मिलता खुमार।
अब तो हम खुदाई खिदमतगार हों।
उसकी बंदगी में सब ख़ुशगवार हों।
– गौतम प्रधान ‘मुसाफ़िर’
दिनांक 12 अक्टूबर 2025
केलो विहार, रायगढ़, छत्तीसगढ़
नोट –
खुदाई खिदमतगार = खुदाई खिदमतगार’ एक पश्तो शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ “ईश्वर के सेवक” या “ईश्वर की रचना के सेवक” है।
खुशगवार= जो चित्त के अनुकूल हो, जो मन को अच्छा लगे, मनोवांछित, रुचिकर
राहगुज़र = रास्ता, मार्ग, पथ
ख़ुशगवार का मतलब है मन और माहौल दोनों के लिए अच्छा और आनंददायक।

Recent Comments