रायगढ़। जिले सहित पूरे छत्तीसगढ़ में बीते 25 वर्षों से संविधान और कानून का पालन नहीं हो पाने का गंभीर आरोप लगाते हुए महामहिम राष्ट्रपति को आवेदन पत्र सौंपा गया है। इसे लेकर सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शर्मा द्वारा प्रेस वार्ता कर विस्तृत जानकारी देते हुए राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग की गई है।
सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शर्मा ने कहा कि इस अवधि में एक भी नया उद्योग विधि-सम्मत प्रक्रिया के तहत स्थापित नहीं हुआ। अंधाधुंध औद्योगिकीकरण के चलते रायगढ़ देश के अग्रणी प्रदूषित जिलों में शामिल हो चुका है। पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी से न केवल मनुष्य बल्कि जैव विविधता भी गहरे संकट में है। जंगल कानून, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और भूमि अधिग्रहण की वैधानिक प्रक्रिया को पूरी तरह दरकिनार किया गया है।
राधेश्याम शर्मा ने आरोप लगाया गया है कि राज्य की सरकार उद्योगपतियों की सरकार बन चुकी है और पुलिस- प्रशासन भय का वातावरण बनाकर कार्य कर रहा है। तमनार में चल रहे शांतिपूर्ण विरोध को कुचलने के लिए बल प्रयोग किया गया, जिससे बड़े पैमाने पर हानि हुई। एक व्यक्ति की मृत्यु के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। पुलिस और उद्योग प्रबंधन की मिलीभगत से आगजनी व हिंसा कराए जाने का भी आरोप है। हालात ऐसे बनाए गए कि ग्रामीणों और आदिवासियों को धरने पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा।
न्यायपालिका की भूमिका पर भी सवाल, राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की अपील
राधेश्याम शर्मा ने न्यायपालिका की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाया कि न्यायपालिका में बैठे कुछ न्यायाधीश संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करने के बजाय “नाटक” कर रहे हैं। महिला आरक्षक से जुड़े एक मामले सहित कई घटनाओं में न्याय की उम्मीद अब राष्ट्रपति से लगाई जा रही है। चूंकि महामहिम राष्ट्रपति स्वयं आदिवासी समाज से आती हैं, इसलिए उनसे आग्रह किया गया है कि वे छत्तीसगढ़ में संविधान के विपरीत हो रहे कार्यों का संज्ञान लें और भारी जनहानि व लोकतांत्रिक व्यवस्था के पतन को देखते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करें।

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