Wednesday, October 14, 2026
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खेती को उद्योग का दर्जा देने की उठी जोरदार मांग पूर्वाचल कृषक सम्मेलन में किसानों की उपेक्षा पर जताई गई गहरी चिंता…..प्रऊत की कृषि नीति अपनाकर आर्थिक लोकतंत्र स्थापित करने का आह्वान

 

 

 

रायगढ़.
छत्तीसगढ़ी समाज जिला शाखा रायगढ़ द्वारा आज बटमूल आश्रम, साल्हेओना-बनोरा में पूर्वाचल कृषक सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों एवं किसानों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में पटना (बिहार) से आए प्रऊत विचारधारा के वक्ता ने सभा को संबोधित करते हुए देश की वर्तमान कृषि नीतियों पर तीखा प्रहार किया।

वक्ता ने कहा कि देश के नीति-निर्धारकों द्वारा योजनाओं के माध्यम से किसानों के साथ लगातार सौतेला व्यवहार किया गया है। कृषि और कृषकों की उपेक्षा के कारण खेती आज घाटे का सौदा बन चुकी है, जिससे किसान खेती से विमुख होते जा रहे हैं। उन्होंने एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए बताया कि सर्वाधिक खाद्यान्न उत्पादन करने वाले पंजाब के लगभग 40 प्रतिशत किसान खेती छोड़ना चाहते हैं, जबकि हरियाणा में भी खेती से किसानों का पलायन शुरू हो चुका है। राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि की हिस्सेदारी 42.5 प्रतिशत से घटकर 28.2 प्रतिशत रह जाना गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जहां व्यवसायियों और उद्यमियों को मुनाफाखोरी की खुली छूट है, वहीं किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने के लिए बाध्य किया जाता है, जो अक्सर लागत भी नहीं निकाल पाता। विशेष आर्थिक क्षेत्रों के तहत उद्योगपतियों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को दी जा रही रियायतों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि किसानों के हितों की रक्षा करने के बजाय पूंजीपतियों के हित साधने में अधिक सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।

सम्मेलन में प्रऊत की कृषि नीति को अपनाने और आर्थिक लोकतंत्र स्थापित करने का आह्वान किया गया। वक्ता ने कहा कि प्रऊत व्यवस्था में सत्ता का विकेंद्रीकरण होगा, जिसमें सत्ता और पूंजी अलग-अलग हाथों में रहेगी। बड़े उद्योग ‘न लाभ न हानि’ के सिद्धांत पर संचालित होंगे, जबकि मध्यम उद्योग सहकारिता आधारित होंगे, जिनमें स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। विकास योजनाएं विकासखंड स्तर पर बनाई जाएंगी, जिससे बेरोजगारी कम होगी और किसान आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर होंगे।
सम्मेलन के अंत में सरकार से पुरजोर मांग की गई कि देश की अर्थव्यवस्था की नींव माने जाने वाले किसान और उसकी खेती को उद्योग का दर्जा दिया जाए, ताकि उन्हें भी उद्योगों की तरह सुविधाएं, रियायतें और संरक्षण मिल सके।
कार्यक्रम में ग्राम महापल्ली, बनोरा, कोसमपाली, कोतरलिया, जुर्जा, विश्वनाथपाली, सकरबोगा, साल्हेओना, कोड़ातराई, औरदा सहित आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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