रायगढ़। एसईसीएल बरौद के विस्थापित परिवारों में एक बार फिर आक्रोश फूट पड़ा है। 27 नवंबर 2025 को हुए लिखित समझौते के आधार पर प्रति परिवार 6,31,500 रुपये की एकमुश्त विस्थापन राशि देने के वादे के बावजूद अधिकांश प्रभावित परिवारों को अब तक भुगतान नहीं किया गया है। इसे लेकर ग्रामीणों ने एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन कर एसईसीएल प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है।

ग्रामीणों का कहना है कि एसईसीएल प्रबंधन ने स्वयं बैठक कर लिखित सहमति दी थी कि कोल इंडिया की पुनर्वास नीति 2012 के तहत 3 लाख रुपये विस्थापन लाभ, 3 लाख रुपये बोनस/एक्सग्रेशिया राशि तथा 31,500 रुपये निवास भत्ता मिलाकर कुल 6,31,500 रुपये की राशि मकान तोड़ने के 10 दिनों के भीतर एकमुश्त भुगतान की जाएगी। इस समझौते पर ग्रामीण प्रतिनिधियों और प्रबंधन के हस्ताक्षर भी हुए थे।

केवल 4 परिवारों को मिला भुगतान/-
आरोप है कि अब तक केवल चार विस्थापित परिवारों को ही 6,31,500 रुपये की राशि दी गई है, जबकि शेष परिवारों को भुगतान के संबंध में स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा। जिन परिवारों ने अपना मकान तोड़कर भूमि एसईसीएल को सुपुर्द कर दी है, वे अब असमंजस की स्थिति में हैं और अस्थायी व्यवस्था में जीवन यापन कर रहे हैं।
धरना के बाद मांगी 5 दिन की मोहलत/-
धरना-प्रदर्शन के बाद एसईसीएल प्रबंधन ने पुनः पांच दिवस का समय मांगा है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तय समयावधि में सभी पात्र परिवारों को समझौते के अनुसार पूरी राशि का भुगतान नहीं किया गया तो वे उग्र आंदोलन करेंगे और आवश्यक हुआ तो उच्च न्यायालय बिलासपुर का दरवाजा भी खटखटाएंगे।
प्रभावितों का कहना है कि यह केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि उनके सम्मान और अधिकारों से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने दो टूक कहा कि लिखित समझौते का पालन हर हाल में होना चाहिए, अन्यथा आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन की होगी।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एसईसीएल प्रबंधन अपने लिखित वादे को किस प्रकार और कितनी गंभीरता से निभाता है।

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