
रायगढ़।।
रायगढ़ जिला भले ही एक औद्योगिक नगरी के रूप में विख्यात हो स्टील के बाद पावर हब के रूप में बहुत तेजी से आगे बढ़ा है। इसकी वजह से जिले वासियों को रोजगार स्वच्छ वातावरण को छोड़कर प्रदूषण, बेरोजगारी, फ्लाई ऐश डस्ट, नाना प्रकार की गंभीर बीमारियां और सड़क हादसे जैसी गंभीर घटनाएं बतौर उपहार स्वरूप मिले हैं। वर्तमान में जिले वासियों के लिए फ्लाई ऐश डस्ट का जहां तहां डंप करना एक बड़ी मुसीबत और गंभीर बीमारियों की एक बड़ी वजह बनते जा रही है। इधर फ्लाई ऐश घोटाला करने वाले शहर और जिले के रसूखदार बनते जा रहे हैं।

फ्लाई ऐश को लेकर एक हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन जिला सत्र न्यायाधीश के नाम, कलेक्टर और जिले के पुलिस कप्तान को प्रेषित की गई है। विधि वक्ता संघ सहित संयुक्त हस्ताक्षरित प्रेषित शिकायत पत्र में कहा गया है कि अगर फ्लाई ऐश परिवहन की सही तरीके से जांच की जाए तो यह एक बड़े स्कैम के रूप में बाहर आएगा, किस तरह से फ्लाई ऐश का कारोबार एक सिंडिकेट के तौर पर काम कर रहा है।
दरअसल फ्लाई ऐश डंप करने के मामले में ट्रांसपोर्टर जिला प्रशासन के कार्रवाई से एक कदम आगे बढ़कर फ्लाई ऐश यत्र तत्र फेंक कर निपटा दे रहे हैं। जीपीएस सिस्टम महज एक खाना पूर्ति के लिए लगाए हैं। जानकारों ने बताया कि फ्लाई ऐश का निपटान जिले का एक बड़ा कारोबार बन चुका है और इस कारोबार से जुड़कर ट्रांसपोर्टर रातों रात मोटी कमाई कर रहे हैं।

शिकायतकर्ताओं ने बताया कि फ्लाई ऐश जिस तरह से जहां तहां फेंक दिया जा रहा है इसकी वजह से प्रकृति और पर्यावरण को भारी क्षति हो रही है। जंगलों में सड़क किनारे खाली जगहों पर जुगाड बनाकर जिस तरह से फेंका जा रहा है यह हवा में वायु के साथ इनके काले डस्ट सीधे लोगों के शरीर में प्रवेश कर रहा है। इतना ही नहीं बारिश में यह पानी से बहकर खेत खलिहान और नदियों में समाहित हो रहा है। इसकी वजह से खेत बंजर होते जा रहे है और नदियां तालाब के पानी दूषित हो रहे हैं।
फ्लाई ऐश के साथ उद्योगों द्वारा छोड़ा जाने वाला काला धुआं जो लगातार आबोहवा को प्रदूषित कर रही है। किसी भी औद्योगिक क्षेत्र में जाने पर उद्योगों की चिमनियों से काला धुआं आसमान में उड़ता आसानी से दिखाई देता है। इतना ही सूत्र बताते हैं कि रात के अंधेरे में उद्योगों की चिमनियों से फूल फोर्स में काला धुआं बाहर छोड़ा जाता है। इस पर पर्यावरण विभाग का दावा है कि हर उद्योग में ईएसपी मशीन लगी है, लेकिन औद्योगिक क्षेत्र ग्रामीणों का भी दावा है कि इएसपी मशीन महज दिखावे का है। जब किसी उद्योग से काला धुआं चिमनी से छोड़ा जाता है उस समय पूरे क्षेत्र में एक तेज आवाज सुनाई देती है। उद्योग क्षेत्र के ग्रामीणों का दावा है कि जब ये आवाज आए तो समझ जाइए की चिमनी को खोला गया है जहां से काला धूंआ तेज गति से बाहर खुले आसमान में छोड़ा जा रहा है।
एक सामाजिक कार्यकर्ता ने यह भी दावा किया है की फ्लाई ऐश के जहां तहां से डंप से केलो नदी भी अछूती नहीं है केलो नदी के ऊपरी तट से जंगलों में फेंके गए फ्लाई ऐश बारिश के पानी के साथ केलो डेम में भी समाहित हो रहा है। और चूंकि केलो नदी से पूरे शहर में पानी की आपूर्ति हो रही है और यह पानी बीमारियों का सबसे बड़ा कारण बन रहा है। यदि इसकी जांच हो जाए तो बड़ा खुलासा होगा और केलो नदी के पानी की सही तरीके से जांच हो जाए तो उसका पानी पीने लायक नहीं होगा यह भी उजागर हो जायेगा।
फ्लाई ऐश निपटान में भाड़े का बड़ा गेम होता है फ्लाई ऐश परिवहन दूरी के हिसाब से भाड़ा तय होता है। जानकर बताते हैं कि जीपीएस सिस्टम में बड़ा गेम होता है। फ्लाई ऐश को सेटिंग करके कहीं भी फेंक दिया जाता है और जीपीएस सिस्टम को ऐसी किसी वाहन में सेट किया जाता है जो उस निर्धारित दूरी से आना जाना करता है। इस तरह ऐसा खेल खेला जाता है जिससे सांप भी मर जाता है और लाठी भी नही टूटती है। अर्थात जीपीएस सिस्टम भी सही हो जाता है और गेम भी ओवर हो जाता है।

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