Friday, August 28, 2026
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एक हकीकत एक फसाना बन कर रह गया पुरूंगा कोल माइंस ……माइंस इंचार्ज ने भी रखी अपनी बात और कहा …अंडर ग्राउंड माइंस से सतही भूखंड नहीं होगा प्रभावित ……इधर ग्रामीण हैं कि बात सुनने को नहीं तैयार ..कह रहे पेसा कानून के तहत यह हमारा अधिकार

 

रायगढ़ । जिले के धरमजयगढ़ स्थित पुरुंगा कोल ब्लॉक इन दिनों खूब चर्चा का विषय बना हुआ है। पुरूंगा कोल माइंस जो तेन्दुमुड़ी, पुरुंगा और साम्हरसिंघा पंचायत क्षेत्र में आता है। यह कोल ब्लॉक यहां के लोगों के लिए एक हकीकत और एक फसाना बन गया है। हकीकत ये कि अंडर ग्राउंड कोल माइंस के लिए प्रभावित क्षेत्र का प्रभावितों को कोई मुआवजे का प्रवधान नहीं होता है और फसाना ये कि प्रभावित हैं लेकिन प्रभाव क्षेत्र से बाहर रहेंगे। अंडर ग्राउंड माइंस के उपयोग के लिए सिर्फ 10 हेक्टेयर भूखंड ही अधिग्रहित होगी और वह फॉरेस्ट लैंड होगी। अंबुजा सीमेंट के नाम से अडानी को मिली पुरूंगा कोल माइंस व्यवसायिक कोल माइंस होगी। 10 प्रतिशत कोयला सीमेंट प्लांट के लिए उपयोग होगा और बाकी कोयला खुले बाजार में बेचा जाएगा।

बस्ती में बैठक करते ग्रामीण

इधर कोल माइंस शुरू करने के पूर्व पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए जन सुनवाई होनी है इसके पहले ग्रामीण क्षेत्र में विरोध के स्वर गूंजने लगे हैं। और लगातार ग्रामीण इलाके में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है और ग्राम सभा प्रस्ताव लाकर कोल ब्लॉक की जनसुनवाई 11 नवंबर को निरस्त करने की मांग कर रहे है। और यह मांग पेसा कानून के तहत प्राप्त अधिकारों का प्रयोग कर, कर रहे हैं। यह कोल ब्लॉक अडानी की कमर्शियल कोल माइंस है। यह कोल माइंस पूरी तरह से अंडर ग्राउंड होगा इसके बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में ओपन कोल माइंस की भयावह स्थिति को देख चुके है यही वजह है की ग्रामीण किसी भी हाल में माइंस खुलने नहीं देना चाहते हैं। और इसे लेकर गांव गांव में लगातार बैठक कर विरोध की एकता को मज़बूत बनाने का दौर चल रहा है।

बैठक में शामिल ग्रामीण

माइंस खुलने से क्षेत्र में जल जंगल जमीन के साथ पर्यावरण प्रदूषण का प्रभाव पड़ेगा यह मानते हुए ग्रामीण लगातार माइंस खुलने को लेकर विरोध में खड़े हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अनुसूची 5 अंतर्गत हमे पेसा कानून के तहत अधिकार प्राप्त है कि हम किसी व्यवसायिक प्रयोजन के लिए अपनी जमीन दें या न दे। प्राप्त पेसा कानून के अधिकार के तहत ग्रामीण ग्राम सभा कर माइंस नहीं खुलने को लेकर ग्राम सभा में प्रस्ताव ला रहे हैं। और इससे प्रशासन को भी अवगत करा रहे हैं।

विरोध में आहूत ग्राम सभा में उपस्थित ग्रामीण

बता दें कि पुरूंगा कोल माइंस के लिए शासन द्वारा 869.025 हेक्टेयर आबंटित किया गया है । इसके दायरे में 621.331 हेक्टेयर वन भूमि, 26.898 हेक्टेयर गैर-वन भूमि, एवं 220.796 हेक्टेयर निजी भूमि का एरिया शामिल है। चूंकि यह माइंस अंडर ग्राउंड होगा
जिसमे प्रतिवर्ष क्षेत्रफल में 2.25 मिलियन टन प्रति वर्ष कोयले का उत्पादन होना है। और विरोध को लेकर जो खास बात है वो ये बताई जा रही है कि चूंकि माइंस अंडर ग्राउंड होने की वजह से सतही भूखंड किसी भी तरह से प्रभावित नहीं होती है इसलिए अंडर ग्राउंड माइंस में मुआवजे का प्रावधान नहीं होता है। ग्रामीणों की माने तो माइंस खुलने से क्षेत्रवासी धूल गुबार प्रदूषण की मार झेलेंगे और मुआवजा के नाम पर कुछ नहीं मिलने वाला है और शायद ज्यादा इसी बात की नाराजगी है। अंडर ग्राउंड माइंस होने की वजह से किसी प्रकार के मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं होता है शायद ग्रामीणों के विरोध का एक बड़ा कारण यह भी हो सकता है।

पुरूंगा कोल माइंस के इंचार्ज ने बताया हकीकत ये है /-

इसे लेकर पुरुंग्गा प्रोजेक्ट इंचार्ज एम के सिंह ने बताया अंडर ग्राउंड माइंस से न तो किसी तरह का पर्यावरण को क्षति पहुंचेगी और न ही ग्रामीणों की खेती किसानी पर किसी तरह का प्रभाव पड़ेगा ग्रामीण किसान जैसा अब तक खेती किसानी करते चले आ रहे हैं वैसे ही आगे भी वे खेती किसानी करते रहेंगे। खेती किसानी जल जंगल जमीन पर माइंस की वजह से कोई भी प्रभाव नहीं पड़ेगा। माइंस से कोयला उत्पादन के लिए टनल बनाने के बाद लगभग 130 मीटर से भी नीचे जाने के बाद से कोयले की खुदाई होगी, इसकी वजह से ऊपरी सतह पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके वाटर लेबल पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्षेत्र में वैसे भी वाटर लेबल 50 मीटर है इतने में यहां बोर में पानी निकल जाता है। उनका यह भी कहना है कि बल्कि किसानों को खेती किसानी के लिए माइंस से निकलने वाली पानी को किसानों को प्रदान की जाएगी इससे किसानों को खेती किसानी के लिए पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। पुरूंगा कोल माइंस के प्रभारी एमके सिंह ने बताया कि इस माइंस के खुलने से गांव के लगभग हजार लोगों को तो सीधे रोजगार प्राप्त होगा इसके अलावा और भी कई फायदे प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों को मिलेगा।

 

 माइंस के विरोध में आदिवासी ग्रामीणों को आदिवासी नेताओं का मिलेगा साथ –
माइंस के विरोध में लगातार ग्रामीणों का विरोधी बिगुल बज रहा है ऐसे में खास बात ये है कि धरमजयगढ़ ब्लॉक आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में से एक है। ज्यादातर आदिवासी समुदाय क्षेत्र में निवास करता है। अब देखना होगा की इन आदिवासी ग्रामीणों की आवाज को आदिवासी मुख्यमंत्री आदिवासी सांसद और आदिवासी विधायक किस तरह से लेते है क्या आदिवासियों के पक्ष में आदिवासी नेताओं का प्रशासन पर कितना दबाव बनता है यह आने वाले चंद दिनों में देखने को मिलेगा।
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