Tuesday, October 13, 2026
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अनीस साबरी की कव्वाली ने दर्शकों को झूमने किया मजबूर….चक्रधर समारोह की यह रात अनीस साबरी के रही नाम देर रात तक झूमते रहे दर्शक …लगातार आती रही फरमाइश …अब लोगों को कैलाश खेर का बेसब्री से इंतजार ….

 

रायगढ़.
40वें चक्रधर समारोह के चौथे दिन की सांस्कृतिक संध्या देश के मशहूर कव्वाल अनीस साबरी के शानदार कव्वाली ने दर्शकों को निहाल कर दिया। उनकी दमदार आवाज़, लयबद्ध संगत और सूफियाना अंदाज ने ऐसा समां बांधा कि समारोह स्थल देर रात तक संगीत और तालियों की गूंज से सराबोर रहा। अनीस साबरी ने एक के बाद एक लोकप्रिय कव्वालियों और सूफी गीतों की प्रस्तुति देकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। बता दें कि अनीस साबरी अजमेर शरीफ के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के चिश्ती रंग में गाते है जो 13वी सदी के सूफी शायर अमीर खुसरो की परंपरा का पालन करते है।

अनीस साबरी ने चक्रधर समारोह में विशेषकर अली मौला, बहती है प्रेम की गंगा बहने दो……..छत के ऊपर एक तिरंगा रहने दो, प्यार झूठा था तो जताया ही क्यूं……..ऐसे जाना था तो आया ही क्यूं, दुश्मनों से मोहब्बत करो, तुझे प्यार करते करते मेरी उम्र बीत जाए…..तेरे दिल की धड़कनों में कोई गीत गुनगुनाऊ, प्यार से प्यार का सामान बनाया जाए, मां से बढ़कर कोई दूसरा प्यार दुनिया में होता नही, जैसे देशभक्ति और सुप्रसिद्ध गीतो की प्रस्तुति ने समारोह में आध्यात्मिकता, ऊर्जा और भारत देश में रहने वाले सभी हिन्दुस्तानियों के मन में देश के प्रति प्यार के लिए जागरूक किए।

श्रोताओं में मौजूद हर वर्ग के लोग उनके द्वारा प्रस्तुत कव्वाली और शेरों-शायरी सुनकर झूम उठे और पूरा दर्शक दीर्घा तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। जनाब अनीस साबरी द्वारा प्रस्तुत कव्वाली की हर पंक्ति दिलों को छू लेने वाली रही। गीतों की गहराई और उनके स्वर की ताक़त ने न सिर्फ सभी का मनोरंजन किया बल्कि श्रोताओं को सूफी परंपरा की आध्यात्मिक अनुभूति भी कराई। अनीस साबरी के कव्वाली प्रदर्शन ने चक्रधर समारोह की गरिमा को नई ऊंचाई दी।

देर रात तक चली यह प्रस्तुति दर्शकों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव साबित हुई। चक्रधर समारोह की चौथी रात अनीस साबरी की कव्वाली से गुलजार रहा और अंत तक दर्शक फरमाइश करते रहे। बता दे कि अनीस साबरी देश के सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले युवा सूफियाना कव्वालों में गिने जाते है।

उन्होंने 4 वर्ष की उम्र से ही अपने पिता जनाब रईस साबरी से इस कला की बारीकियां सीखनी शुरू की और 6 वर्ष की उम्र में अपना पहला प्रदर्शन शुरू किया। वे सन 2006 में इन्हें कर्नाटक उर्दू अकादमी, बेंगलोर तथा 2007 में अमीर खुसरो अकादमी, चेन्नई से पुरस्कृत किया गया है। सन 2003 में अनीस साबरी ने सोनिक इंटरप्राइजेस के साथ मिलकर कई हिट संगीत एल्बमस जारी किए। जिसमें चिश्ती रंग ने बेहद लोकप्रियता हासिल की।

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