Wednesday, April 22, 2026
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आदिवासियों के हक़ पर डाका: खदान विस्तार, जमीन नीति और SIR को लेकर कांग्रेस का तीखा हमला राष्ट्रीय सचिव जरिता लेफ़्थलांग ने रायगढ़ में बोलीं एक पेड़ माँ के नाम की बात करने वाली सरकार हजारों माँओं की हत्या कर रही …

 

 

रायगढ़। कोयला खदानों के बढ़ते विस्तार, आदिवासी क्षेत्रों में हो रहे कथित उत्पीड़न, जमीन अधिग्रहण और SIR को लेकर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमाती दिख रही है। इसी क्रम में कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव जरिता लेफ़्थलांग रायगढ़ जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय में पत्रकारों से रू-ब-रू हुईं और प्रदेश सरकार पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सरकार एक ओर ‘एक पेड़ माँ के नाम’ जैसा भावनात्मक कार्यक्रम चला रही है, वहीं दूसरी ओर खदानों के लिए हजारों पेड़ और हजारों माँओं की प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष हत्या कर रही है।

 

जरिता ने आरोप लगाया कि 5वीं अनुसूची को खत्म करना चाहती है और आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन को छीनना चाहती है। पेस कानून को खत्म कर आदिवासियों को बेदखल करने का काम कर रही है।
प्रदेश का मुख्यमंत्री आदिवासी होकर भी आदिवासियों का दर्द नहीं समझ रहे।
पत्रकारो के सवाल का जवाब देते हुए जरिता लेफ़्थलांग ने बेहद कठोर शब्दों में मुख्यमंत्री पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह स्थिति विडंबनापूर्ण है कि प्रदेश का मुख्यमंत्री स्वयं आदिवासी समाज से आते हैं, लेकिन उनकी सरकार आदिवासियों के साथ लगातार अन्याय कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार आदिवासियों के अधिकार खत्म कर रही है, उनकी जमीन छीनी जा रही है। धोराभाठा कोयला खदान की जनसुनवाई के विरोध में महिलाएं बच्चे युवा बुजुर्ग कड़ाके की ठंड में रात दिन धरने पर बैठे हैं।

SIR को लेकर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि BLO दबाव में मर रहे, किसान आत्महत्या को मजबूर हैं। राज्य के विभिन्न इलाकों में फैले SIR सिस्टम को लेकर भी उन्होंने सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने दावा किया कि कई स्थानों पर BLO पर इतना दबाव बनाया जा रहा है कि वे मानसिक तनाव में आकर मौत का शिकार हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि एक किसान ने सिर्फ इसलिए अपनी जान दे दी क्योंकि उसे धान का टोकन नहीं मिला। यह कैसी सरकारी व्यवस्था है जिसमें किसान अपना गला काटने पर मजबूर हो रहा है? धान खरीदी हो पिछड़ों दलितों पर सरकार लगातार अन्याय कर रही है। छत्तीसगढ़ की जनता इस सरकार से बेहद नाराज है।
जरिता ने आगे कहा कि सरकार की नई जमीन गाइडलाइन लोगों के हितों के खिलाफ है और इससे ग्रामीण, किसान और आदिवासी सभी वर्ग प्रताड़ित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस सरकार के बारे में जितना कम कहा जाए, उतना ही अच्छा है क्योंकि यह सरकार जमीन पर उतरकर लोगों का हक छीनने का काम कर रही है। हम तो जनता के हक के लिए जमीन पर उतरते हैं, लड़ते हैं, और आगे भी लड़ते रहेंगे। युवाओं, बेरोजगारों और किसानों की कोई सुनवाई नहीं होने पर
राष्ट्रीय सचिव ने बेरोजगारी और युवा मुद्दों पर भी सरकार की खामियों को उजागर किया।

200 यूनिट बिजली माफी पर भी वार करते हुए कहा कि नकल तो करते हैं, पर अकल नहीं लगाते। जरिता लेफ़्थलांग ने बिजली बिल माफी को लेकर भी सरकार पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि 200 यूनिट बिजली माफी की योजना सिर्फ एक नकल है, उन्होंने सूर्य-घर योजना का एक साल में लाभ लेना अनिवार्यता उन्होंने इस पर सवाल खड़ा किया और कहा कि यह सरकार की खराब नीयत का संकेत है।

उन्होंने साफ कहा कि यदि सरकार जनविरोधी फैसलों को वापस नहीं लेती, खदानों के नाम पर हो रहे दमन को नहीं रोकती और पिछड़ों आदिवासियो की लड़ाई में कांग्रेस हमेशा उनके साथ रहेगीं । उन्होंने कहा कि हम जनभावनाओं के साथ खड़े हैं।

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