Saturday, August 29, 2026
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बरमकेला के बड़े नवापारा धान खरीदी केंद्र में भ्रष्टाचार की खेती, किसानों का खून चूस रहा समिति प्रबंधक …3 करोड़ 95 लाख के गबन के दस्तावेजी सबूत फिर भी कार्रवाई सिफर अब EOW–ACB जांच की उठ रही मांग…तौल में धांधली फर्जी ऋण और दबंगई से त्रस्त किसान प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

 

 

सारंगढ़–बिलाइगढ़। जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत बड़े नवापारा सहकारी समिति धान खरीदी केंद्र इन दिनों गंभीर आरोपों के चलते विवादों में घिरा हुआ है। यहां पदस्थ समिति प्रबंधक कीर्ति चंद चौहान पर वर्षों से किसानों के शोषण और करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार के आरोप लगते आ रहे हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज तक उसके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्तमान में समिति प्रबंधक पर 3 करोड़ 95 लाख रुपये के गबन और वित्तीय अनियमितता का आरोप है, जिसके दस्तावेजी प्रमाण भी उपलब्ध बताए जा रहे हैं। इसके बावजूद यह प्रबंधक पिछले 10–15 वर्षों से एक ही पद पर बना हुआ है और हर वर्ष नए आरोपों के साथ सुर्खियों में रहता है।

किसानों के नाम पर फर्जी ऋण, सरकारी योजनाओं की आड़ में घोटाला

किसानों का आरोप है कि कीर्ति चंद चौहान द्वारा उनकी जानकारी और सहमति के बिना विभिन्न मदों व योजनाओं के नाम पर ऋण निकालकर रकम का गोलमाल किया गया। इस वर्ष भी कई किसानों के नाम पर फर्जी तरीके से ऋण निकाले जाने की शिकायतें सामने आई हैं। किसानों द्वारा कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो सहकारिता विभाग ने गंभीरता दिखाई और न ही किसी जांच एजेंसी को मामला सौंपा गया।

धान तौल में खुली लूट, दबंगई के दम पर वसूली

धान खरीदी केंद्र में तौल प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी का आरोप भी सामने आया है। किसानों का कहना है कि जहां एक बोरा धान का निर्धारित वजन 40.600 किलोग्राम होना चाहिए, वहां जबरन 41.200 किलोग्राम तक तौल कराया जा रहा है। विरोध करने पर किसानों को धमकाने और दबाव बनाने के आरोप भी लगाए गए हैं।

आए दिन हंगामा, फिर भी कोई सुनवाई नहीं

स्थानीय किसानों के अनुसार, बड़े नवापारा समिति में लगभग रोज़ किसानों का आक्रोश देखने को मिलता है। कई बार स्थिति हंगामे तक पहुंच जाती है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समिति प्रबंधक की आय और संपत्ति की जांच कराई जाए तो वर्षों से चले आ रहे भ्रष्टाचार की परतें खुल सकती हैं।

EOW और ACB जांच की मांग, संरक्षण के आरोप

अब किसानों और स्थानीय लोगों द्वारा मांग की जा रही है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच EOW या ACB से कराई जाए, ताकि करोड़ों के गबन, फर्जी ऋण और तौल घोटाले की सच्चाई सामने आ सके। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर इतने गंभीर आरोपों और दस्तावेजी सबूतों के बावजूद अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या किसी राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण के चलते यह पूरा मामला दबाया जा रहा है?

इस बात की भी चर्चा है कि बड़े नवापारा क्षेत्र के किसान अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं और चेतावनी दे रहे हैं कि यदि जल्द ही EOW–ACB जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

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