Thursday, August 27, 2026
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जिंदल की विधि विरुद्ध जनसुनवाई के खिलाफ ग्रामीणों का आर्थिक नाकेबंदी आंदोलन तेज …..डोंगामहुआ कोयला खदान के बाहर सैकड़ों ग्रामीण सड़क पर बैठे… सामाजिक कार्यकर्ता दीपक शर्मा के लापता होने से आंदोलन को मिला नया तेवर…

 

 

 

रायगढ़। जिंदल समूह की कोयला खदान परियोजना के लिए कथित रूप से नियमों को ताक पर रखकर कराई गई जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। डोंगामहुआ कैप्टिव पावर प्लांट और कोयला खदान क्षेत्र के बाहर ग्रामीणों ने आर्थिक नाकेबंदी कर दी है, जिससे उद्योग का आवागमन और गतिविधियां प्रभावित होने लगी हैं।


बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं, पुरुष और बुजुर्ग सड़क पर बैठकर शांतिपूर्ण ढंग से विरोध जता रहे हैं। ग्रामीण महिलाएं इस आंदोलन की सबसे मजबूत तस्वीर बनकर उभरी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जनसुनवाई के दौरान उनकी आपत्तियों, सुझावों और विरोध को नजरअंदाज किया गया और जबरन कार्यवाही पूरी दिखाकर परियोजना को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई।

ग्रामीणों का आरोप है कि यह जनसुनवाई विधि विरुद्ध थी और पर्यावरणीय कानूनों के साथ-साथ पेसा कानून का भी उल्लंघन किया गया। इसी के विरोध में ग्रामीणों ने उद्योग के मुख्य द्वार और संपर्क मार्गों पर बैठकर आर्थिक नाकेबंदी शुरू की है। मौके पर पुलिस बल की तैनाती भी देखी जा रही है, लेकिन ग्रामीण शांतिपूर्ण ढंग से अपने अधिकारों की मांग पर डटे हुए हैं।

इसी बीच आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता दीपक शर्मा के अचानक लापता हो जाने से स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है। दीपक शर्मा लंबे समय से जिंदल समूह की खदानों और उद्योगों के खिलाफ जनहित के मुद्दों को उठाते रहे हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से खदानों के पर्यावरणीय व सामाजिक दुष्प्रभावों को उजागर करते रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि दीपक को पुलिस ने हिरासत में लिया है, हालांकि अब तक प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

दीपक शर्मा के लापता होने को लेकर परिजनों ने थाने में आवेदन देकर उनकी खोजबीन की मांग की है। वहीं इस मुद्दे को लेकर युवा कांग्रेस ने भी कड़ा रुख अपनाया है। बीती रात शहर के गांधी प्रतिमा के सामने युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने धरना प्रदर्शन कर दीपक शर्मा की तत्काल रिहाई और ग्रामीणों के आंदोलन पर दमन बंद करने की मांग की।

ग्रामीणों और आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि जब तक विधि विरुद्ध जनसुनवाई को निरस्त नहीं किया जाता और दीपक शर्मा के मामले में सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक उनका आंदोलन और आर्थिक नाकेबंदी जारी रहेगी। इलाके में बढ़ते जनआक्रोश को देखते हुए प्रशासन और उद्योग प्रबंधन के सामने स्थिति को संभालना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

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