Friday, August 28, 2026
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धान के नाम पर किसानों से छल पुसौर में सड़क पर बैठे अन्नदाता, प्रशासन की नीतियों के खिलाफ फूटा गुस्सा …किसान नेता लल्लू सिंह जमकर भड़के … टोकन, तौल और उठाव में भारी गड़बड़ी—गिरदावरी के बाद भी नहीं लिया जा रहा धान…. 30 प्रतिशत कटौती को लेकर उद्वेलित हुए किसान

 

 

रायगढ़।

पुसौर क्षेत्र में धान खरीदी को लेकर किसानों का सब्र जवाब दे गया। प्रशासनिक उदासीनता और अव्यवस्थाओं के खिलाफ किसानों ने सड़क पर बैठकर धरना दिया, जिससे मार्ग पर आवागमन प्रभावित हुआ। पुसौर में किसान नेता लल्लू सिंह के नेतृत्व में मौके पर मौजूद किसानों ने स्पष्ट कहा कि गिरदावरी पूरी होने और टोकन मिलने के बावजूद उनका धान नहीं लिया जा रहा जो सीधे-सीधे किसानों के साथ धोखा है।

धरने पर बैठे किसानों का आरोप है कि प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों और तहसील कार्यालयों के बीच तालमेल की भारी कमी के कारण धान उठाव प्रभावित है। टोकन जारी होने के बाद भी केंद्रों पर मनमानी की जा रही है। किसानों ने बताया कि 21 क्विंटल की जगह मात्र 18.40 क्विंटल तक का टोकन काटा जा रहा है और पूछने पर जिम्मेदारी एक-दूसरे पर टाली जा रही है।

कृषक और किसान नेता लल्लू सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सोसायटी स्तर पर धान उठाव की सीमा 1800 किलो से घटाकर 300 किलो कर दी गई, जिससे छोटे और सीमांत किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इस सीमा के कारण किसान समय पर अपना धान बेच नहीं पा रहे नतीजतन आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। ऊपर से तौल के दौरान 30 प्रतिशत तक की कटौती कर दी जाती है। जिससे किसानों की मेहनत पर सीधा डाका पड़ रहा है।

किसानों ने यह भी सवाल उठाया कि पंजीकरण और भौतिक सत्यापन के बावजूद टोकन नहीं दिए जा रहे, और जहां दिए भी गए हैं वहां उठाव में अनावश्यक देरी की जा रही है। बोनस भुगतान और उसकी समय-सीमा को लेकर भी स्थिति साफ नहीं की जा रही, जिससे किसानों में भारी आक्रोश है। किसान नेता लल्लू सिंह की अगुवाई में शाम तक किसान अपने अधिकारों के लिए डटे रहे।

धरनास्थल पर किसानों ने चेतावनी दी कि यदि तुरंत व्यवस्था दुरुस्त कर धान उठाव शुरू नहीं किया गया, तौल में हो रही कटौती पर रोक नहीं लगी और टोकन व्यवस्था पारदर्शी नहीं बनी, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। किसानों ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप, दोषियों पर कार्रवाई और निर्बाध धान खरीदी की मांग की है।

पुसौर में सड़क पर बैठे किसानों की यह तस्वीर साफ संदेश दे रही है—अन्नदाता को मजबूर मत करो, वरना आंदोलन की आग और तेज होगी।

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