Friday, August 28, 2026
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धान से भी बड़ा निकला बारदाना घोटाला, रायगढ़ में सरकारी बोरी की लूट का संगठित खेल उजागर ….एक साल में 89 हजार सरकारी बारदाना गायब FIR दर्ज वर्षों से सक्रिय संरक्षित गिरोह की परतें खुलीं ….डीएमओ कार्यालय का दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी संदेह के घेरे में…  जांच की मांग

 

रायगढ़।

जिले में धान खरीदी से जुड़े घोटालों की चर्चा अब तक आम रही है, लेकिन इस बार जो मामला सामने आया है उसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। धान से कहीं बड़ा और गंभीर घोटाला सरकारी बारदाना (बोरियों) का सामने आया है, जिसे वर्षों से संगठित तरीके से अंजाम दिया जा रहा था।

अभिभाजित रायगढ़ जिले के बरमकेला–सारंगढ़ क्षेत्र में पूर्व में हुए धान खरीदी घोटालों की जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ था कि कागजों में हवाई जहाज की रफ्तार से खरीदी दिखाकर धान का आवंटन, मिलिंग और चावल जमा तक का खेल खेला गया। लेकिन अब जांच की दिशा बारदाना की ओर मुड़ी तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

एक जानकारी के अनुसार इस वर्ष में अकेले 89 हजार सरकारी बारदाना गायब पाए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएमओ जाह्नवी जैन और जिला खाद्य अधिकारी चितरंजन सिंह ने त्वरित कार्रवाई करते हुए FIR दर्ज करवा दी। विभागीय स्तर पर कार्रवाई हो चुकी है, अब चुनौती पुलिस के सामने है कि वह गायब बारदाना की जब्ती और रिकवरी कैसे सुनिश्चित करती है।

सूत्रों के मुताबिक यह कोई एक साल का खेल नहीं बल्कि पिछले 7–8 वर्षों से चल रहा सुनियोजित घोटाला है। जांच में यह बात उभरकर आई है कि डीएमओ कार्यालय में पदस्थ एक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी, जो वर्षों से धान संग्रहण केंद्रों के बारदाना का लेखा-जोखा संभाल रहा था, इसी पूरे खेल का अहम किरदार रहा है। आरोप है कि उसी के संरक्षण में लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये के सरकारी बारदाना खुले बाजार में बेच दिए गए।

विश्वस्त सूत्रों की मानें तो बीते 7–8 वर्षों में इस कर्मचारी और उसके परिवार ने अकूत संपत्ति खड़ी कर ली है। ट्रेवल्स के नाम पर कई वाहन और अलग-अलग स्थानों पर बेनामी परिवहन जमीनों की जानकारी सामने आ रही है फिलहाल यह जांच का विषय है। हैरानी की बात तो यह है कि धान की ट्रांसपोर्टिंग में भी इनके इशारे पर वाहनों की संलग्नता की बात भी सामने आ रही है इस तरह से एक दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी की पूरी सिस्टम ही संदेह के दायरे में हैं। जिसकी जांच और कार्रवाई आम जन हित में सर्वोपरि है।

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा आम है कि अब तक यह सब कुछ विभागीय संरक्षण में चलता रहा। ऐसे में जिला प्रशासन से मांग उठ रही है कि केवल FIR तक सीमित न रहकर, संबंधित दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी सहित पूरे नेटवर्क पर शिकंजा कसा जाए और आय से अधिक संपत्ति की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि ईमानदारी से जांच हुई, तो बारदाना घोटाले में और भी कई बड़े नामों के सामने आने से इनकार नहीं किया जा सकता।

वर्सन
हमारे पास सिर्फ एक साल की जानकारी है और हमने 89 हजार बारदानों को लेकर पुलिस में एफआईआर दर्ज कराया है। पुराने सालों का हमारे पास कोई आंकड़ा नहीं है।
जाह्नवी जैन , डीएमओ रायगढ़

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