Saturday, June 13, 2026
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रायगढ़ को बढ़ते प्रदूषण से बचाने की मांग राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश के नाम सौंपा ज्ञापन …. औद्योगिक प्रदूषण, कोयला परिवहन और भारी वाहनों से होती …बिगड़ते पर्यावरण पर जताई गहरी चिंता…त्वरित व सख्त कार्रवाई की अपील

 

 

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के औद्योगिक जिले रायगढ़ में लगातार बढ़ते प्रदूषण को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद हुई है। युवा कांग्रेस रायगढ़ शहर के जिला अध्यक्ष आशीष जायसवाल ने जिले में गंभीर होती पर्यावरणीय स्थिति पर चिंता जताते हुए महामहिम राष्ट्रपति एवं माननीय भारत के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन प्रेषित किया है। यह ज्ञापन जिला कलेक्टर रायगढ़ के माध्यम से सौंपा गया, जिसमें औद्योगिक वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण से जिले को बचाने के लिए आवश्यक एवं त्वरित कदम उठाने की मांग की गई है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि रायगढ़ जिला वर्तमान समय में प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। जिले में संचालित अनेक उद्योग, कोयला परिवहन, भारी वाहनों की लगातार आवाजाही, खुले में राख फ्लाई ऐश का भंडारण, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई तथा नदियों व जलस्रोतों में औद्योगिक अपशिष्ट छोड़े जाने से पर्यावरण को भारी क्षति पहुंच रही है। इसका सीधा असर आमजन के स्वास्थ्य, प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता पर पड़ रहा है।

आशीष जायसवाल ने ज्ञापन में कहा है कि प्रदूषण के कारण जिले में दमा, एलर्जी, त्वचा रोग, नेत्र रोग और अन्य गंभीर बीमारियों के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों में सांस संबंधी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। कई परिवार किसी न किसी रूप में इन बीमारियों से प्रभावित हैं, जिससे भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि रायगढ़ जिले में खदानों और उद्योगों के विरोध में लंबे समय से जनता अपने जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है, लेकिन इसके बावजूद सरकार और संबंधित विभागों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। आरोप लगाया गया है कि नियमों की अनदेखी कर उद्योगपतियों को संरक्षण दिया जा रहा है, जिससे प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं लग पा रहा है।

युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने ज्ञापन के माध्यम से कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। इनमें जिले में संचालित सभी उद्योगों की पर्यावरणीय जांच कर प्रदूषण नियंत्रण मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना प्रमुख है। इसके साथ ही उद्योगों के निरंतर विस्तार पर रोक लगाने, वायु गुणवत्ता की नियमित निगरानी के लिए पर्याप्त संख्या में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन स्थापित करने की मांग की गई है।

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि औद्योगिक अपशिष्ट एवं दूषित पानी को नदियों और जलस्रोतों में छोड़े जाने से जल प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है, जिस पर तत्काल सख्त रोक लगाई जानी चाहिए। इसके अलावा उद्योगों से निकलने वाले जहरीले राख फ्लाई ऐश के परिवहन में नियमों की अनदेखी की जा रही है। परिवहन के दौरान राख खुले में उड़ती रहती है, जिससे आसपास के गांवों, खेतों और बस्तियों पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। इस पर भी कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख है कि भारी वाहनों और कोयला परिवहन से सड़कों पर धूल का गुबार बना रहता है, जिससे आम लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सड़क किनारे बसे लोगों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। इसके बावजूद प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर न तो प्रभावी निगरानी हो रही है और न ही कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई।

आशीष जायसवाल ने राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश से इस संवेदनशील विषय पर हस्तक्षेप करते हुए संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की अपील की है, ताकि रायगढ़ जिले को पर्यावरणीय संकट से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भयावह हो सकती है।

युवा कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह लड़ाई किसी एक संगठन या व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे जिले के भविष्य से जुड़ी हुई है। स्वच्छ हवा, स्वच्छ पानी और सुरक्षित पर्यावरण प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है, और इसके लिए यदि जरूरत पड़ी तो लोकतांत्रिक व संवैधानिक तरीके से संघर्ष जारी रहेगा।
इस ज्ञापन के माध्यम से रायगढ़ में बढ़ते प्रदूषण का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर उठाया गया है। अब देखना यह होगा कि केंद्र और न्यायपालिका इस पर क्या रुख अपनाती है और जिले के लोगों को कब तक प्रदूषण से राहत मिल पाती है।

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