Tuesday, April 21, 2026
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अब अडानी के दबंगई के कच्चे चिट्ठे की खुलेगी कलई…. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने कलेक्टर से मांगा जवाब….अनुसूचित क्षेत्र के राजस्व भूमि और संरक्षित वन भूमि पर पेड़ों की कटाई किसकी अनुमति से की गई

 

 

 

 

रायगढ़ । राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिलाधिकारी रायगढ़ को नोटिस जारी किया है। जिसमे पूछा गया है कि अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के गांव में राजस्व और संरक्षित वनभूमि पर वनों की कटाई किसकी अनुमति से की गई है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के इस नोटिस से अडानी इंटरप्राइजेस को बड़ा झटका लग सकता है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा बिना ग्राम सभा के राजस्व भूमि और संरक्षित वन क्षेत्र के जंगलों से पेड़ों की अवैध तरीके से कटाई को लेकर अमृतलाल भगत एवं ग्रामीणों की शिकायत पर जिला कलेक्टर को नोटिस जारी कर 15 दिवस के भीतर जवाब मांगा गया है। नोटिस में उल्लेख किया गया है कि इस याचिका पर आयोग द्वारा भारत के संविधान के अनुच्छेद 338 क अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए इस मामले में जांच करने का निश्चय किया गया है। इसलिए आप नोटिस प्राप्त होने के 15 दिवस के अंदर इस आरोप के मामले में की गई कार्रवाई से अवगत कराने कहा गया है। आयोग के नोटिस में यह भी कहा गया है कि यदि 15 दिवस के भीतर जवाब प्राप्त नहीं होता है तो प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आयोग के समक्ष उपस्थित होने का समन जारी कर सकता है।
तमनार के मुड़ागांव स्थित महाजेंको कोल ब्लॉक के लिए अडानी को कोयला उत्पादन करने का काम मिला है और अडानी इस जगह को जल्द से जल्द खाली कराकर कोयले मां उत्पादन शुरू करना चाहता है। इसकी राह में संरक्षित वन और राजस्व वन भूमि के वनों से पेड़ो की कटाई कर साफ करना पहला काम था। अडानी ग्रुप के अधिकारियों द्वारा बीते दिनों ग्रामीणों पर पुलिस और प्रशासन का पहरा लगाकर कानून का भय दिखाकर बड़े पैमाने पर हरे भरे वृक्षों की कटाई कर दी गई। ग्रामीण इसका विरोध करते रह गए लेकिन इसका शासन प्रशासन पर कोई असर नहीं हुआ।
अनुसूचित क्षेत्र होने की वजह से भारत के संविधान ने इन्हे पैसा कानून का अधिकार देता है इसके तहत बिना ग्राम सभा के किसी भी तरह के औद्योगिक खान खनन से सबंधित कोई कार्य नहीं किया जा सकता है। इसके ग्राम सभा की अनुमति की आवश्यकता होती है, इसके भी अडानी के अधिकारियों द्वारा फर्जी ग्राम सभा कार्रवाई और अनुमति तैयार कर लिया और इसी के सहारे बल पूर्वक ग्रामीणों को कानून का भय दिखाकर हजारों की संख्या में हरे भरे पेड़ों की कटाई करा दी गई।
ग्रामीणों की बात जब स्थानीय अधिकारियों और शासन तंत्र द्वारा नहीं सुनी गई तब अनुसूचित जनजाति आयोग जाने का फैसला लिया गया।ग्रामीणों की याचिका पर आयोग द्वारा कड़ा रुख अख्तियार करते हुए जिलाधिकारी को नोटिस जारी कर शिकायत पर की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी गई है।
अब देखना है कि आयोग के कड़े रुख पर जिला प्रशासन किस तरह का रुख अख्तियार करता है। फिलहाल में अडानी को एक बड़ा झटका जरूर लगा है। अडानी ग्रुप को उम्मीद थी कि दबंगई कर ग्रामीणों को डरा धमका कर जंगलों की कटाई कर कोयला निकालना आसान हो जायेगा लेकिन अब दांव उल्टा पड़ता दिखाई दे रहा है। फिलहाल अडानी के अब तक के बड़े तामझाम पर खतरे का बादल जरूर मंडराने लगा है।

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