रायगढ़ ।
शहर में चल रहे आवारा कुत्तों के नसबंदी अभियान को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पशु प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नगर निगम के इस कार्यक्रम में गंभीर अनियमितताओं और पशु क्रूरता के आरोप लगाते हुए कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों को शिकायत सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नसबंदी का कार्य कर रही टीम द्वारा कुत्तों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। तय नियमों के विपरीत शेल्टर में क्षमता से अधिक कुत्तों को रखा जा रहा है, जिससे उनके बीच लड़ाई और चोटिल होने की घटनाएं सामने आ रही हैं। बताया गया है कि जहां एक कमरे में अधिकतम 4 कुत्तों को रखने की व्यवस्था है वहां 8 से 10 कुत्तों को ठूंसकर रखा जा रहा है।

आरोप है कि शेल्टर में न तो पर्याप्त पानी की व्यवस्था है और न ही गर्मी से बचाव के लिए पंखे या कूलर उपलब्ध हैं। साफ-सफाई की स्थिति भी बेहद खराब बताई गई है, जिससे बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है । शिकायत कर्ताओं का कहना है कि नसबंदी के बाद कुत्तों की उचित देखभाल नहीं की जा रही है जबकि नियमों के अनुसार उन्हें दवा, भोजन और सुरक्षित वातावरण देना अनिवार्य है।

मामले में करमजीत सिंघ राजा, शिला टांडी – जिवांस सेवा समिती, नेहा छाबड़ा, मेघा जाटवर, पूर्णिमा, वीणा नायडू व अन्य पशु प्रेमियों द्वारा और गंभीर आरोप लगाया गया है कि अब तक इस अभियान के दौरान 15 से 20 कुत्तों की मौत हो चुकी है जो कि बेहद चिंताजनक और अमानवीय है। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि जिन स्थानों से कुत्तों को पकड़ा जाता है, वहां उन्हें वापस नहीं छोड़ा जा रहा जो कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि संबंधित डॉक्टर और उनकी टीम द्वारा पशु क्रूरता अधिनियम के नियमों की अनदेखी की जा रही है। पूर्व में भी इस विषय पर नगर निगम अधिकारियों के साथ बैठक में समस्याएं उठाई गई थीं लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
पशु प्रेमियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और तत्काल प्रभाव से इस नसबंदी कार्यक्रम को रोका जाए। साथ ही पशुओं के लिए मानक अनुसार सुविधाएं सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।

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