रायगढ़। रायगढ़ में अपने छोटे से कार्यकाल के बावजूद जनसरोकारों और संवेदनशील प्रशासन की अलग पहचान बनाने वाले पूर्व कलेक्टर एवं पूर्व बिलासपुर कमिश्नर हर्ष मंदर एक बार फिर रायगढ़ पहुंच रहे हैं। उन्हें आज भी रायगढ़वासी एक ऐसे कलेक्टर के रूप में याद करते हैं, जिन्होंने प्रशासनिक पद पर रहते हुए सरकारी योजनाओं को कागज से निकालकर जमीन तक पहुंचाने और समाज के अंतिम व्यक्ति से जुड़ने की पहल की थी। हर्ष मंदर 15 सितंबर की रात रायगढ़ पहुंचेंगे और 16 सितंबर को विभिन्न वर्गों से मुलाकात एवं जनसंवाद करेंगे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 16 सितंबर को सुबह 10:30 बजे से दोपहर 2 बजे तक साईं श्रद्धा होटल में सामाजिक कार्यकर्ताओं, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों, पत्रकारों और पूर्व साक्षरता कर्मियों के साथ मुलाकात एवं जनसंवाद होगा। इस दौरान विभिन्न सामाजिक और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
शाम 4.30 बजे वृद्धाश्रम और कुष्ठ बस्ती में पहुंचेंगे, जहां उनके कार्यकाल के दौरान सामाजिक सरोकारों से जुड़े महत्वपूर्ण काम प्रारंभ हुए थे। यहां वे वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों और कुष्ठ बस्ती में रहने वाले परिवारों से मुलाकात करेंगे। इसके बाद 5.30 बजे तक हर्ष मंदर केलो बिहार कॉलोनी पहुंचेंगे। विदित हो कि कर्मचारियों के लिए कॉलोनी के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। यहां वे समिति के सदस्यों और हितग्राहियों से मुलाकात करेंगे।
हर्ष मंदर का रायगढ़ से जुड़ाव उनके प्रशासनिक कार्यकाल से कहीं आगे का रहा है। कलेक्टर के रूप में करीब 11 माह के छोटे से कार्यकाल में उन्होंने साक्षरता अभियान को जमीन पर उतारने के साथ रायगढ़ में लोक शक्ति समिति के गठन की पहल की। प्रशासनिक सेवा में रहते हुए सूचना का अधिकार, भोजन का अधिकार, शिक्षा का अधिकार और स्वास्थ्य के अधिकार जैसे जनाधिकारों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। छत्तीसगढ़ में मितानिन कार्यक्रम, ग्राम सभा और उसमें महिलाओं की भागीदारी तथा वन अधिकार कानून जैसे महत्वपूर्ण प्रयासों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में भी उनकी भूमिका रही।
भारतीय प्रशासनिक सेवा में रहते हुए हर्ष मंदर ने भारतीय प्रशासनिक अकादमी, मसूरी में भी सेवाएं दीं। बाद में उन्होंने प्रशासनिक सेवा से अलग होकर सामाजिक कार्य को अपना क्षेत्र बनाया और दिल्ली में बेसहारा एवं बेघर परिवारों तथा बेसहारा बच्चों के लिए काम कर रहे हैं।
रायगढ़ से पुराना रिश्ता आज भी कायम
प्रशासनिक जिम्मेदारियों से दूर होने के बावजूद हर्ष मंदर का रायगढ़ से जुड़ाव और यहां के लोगों के प्रति उनका स्नेह बना हुआ है। यही वजह है कि वे समय-समय पर रायगढ़ पहुंचकर पुराने साथियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और उन लोगों से मिलते रहे हैं, जिनके साथ उन्होंने अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान काम किया था। उनके इस पुनः आगमन को लेकर सामाजिक और बौद्धिक वर्ग के साथ ही पुराने सहयोगियों में भी उत्साह है।
उक्त जानकारी जन चेतना रायगढ़ के राजेश त्रिपाठी ने दी।

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