Friday, August 28, 2026
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अंबूजा कोयला खदान जनसुनवाई के विरोध में सड़कों पर उतरे ग्रामीण …. प्रशासन मौन…दिल्ली में बैठकर जमीनों की नीलामी करना बंद करो ….पुरूंगा, साभहरसिंह, तेदूमूडी और कोकदार क्षेत्र के ग्रामीणों का आक्रोश … 11 नवंबर की जनसुनवाई रद्द करने की मांग..कहा कि ..

 

 

रायगढ़। अंबूजा कोयला खदान की प्रस्तावित जनसुनवाई दिनांक 11 नवंबर 2025 को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार उग्र होता जा रहा है। आज दिनांक 06 नवंबर 2025 को प्रभावित ग्राम पुरूगा, सांभरसिंघा, तेदूमूडी और कोकदार के सैकड़ों महिला-पुरुष, युवा और बुजुर्गों ने एकजुट होकर रैली निकाली और जिला मुख्यालय पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। हाथों में बैनर तख्तियां लिए हुए जिला मुख्यालय पहुंचे थे।
ग्रामीणों ने साफ कहा कि वे अपने हरे-भरे जंगलों और स्वच्छ पर्यावरण को कोयला खदान की धूल और प्रदूषण से बर्बाद नहीं होने देंगे। उनका कहना है कि खदान से होने वाला ध्वनि और वायु प्रदूषण न केवल जीवन के लिए संकट बनेगा बनो से आच्छादित पारंपरिक जीवन शैली, परंपरागत आजीविका पर भी खतरा उत्पन्न करेगा। दिल्ली में बैठकर जमीनों की नीलामी बंद करने की आवाज लगातार बुलंद होती रही है। हर हाल में जनसुनवाई निरस्त हो इसके लिए पूरा गांव निकल कर जिला मुख्यालय पहुंच गया था।

ग्रामीणों ने चेताया कि यदि जनसुनवाई निरस्त नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
विरोध प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने भी मुखर होकर प्रशासन पर सवाल उठाए कि आखिर उद्योगपतियों के आगे नतमस्तक क्यों है व्यवस्था? ग्रामीणों के मुद्दे अनसुने क्यों किए जा रहे हैं?

इतने बड़े विरोध के बावजूद प्रशासन की खामोशी कई सवाल खड़े कर रही है। प्रभावित गांवों से लेकर जिला मुख्यालय तक विरोध की गूंज साफ सुनाई दे रही है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह साइलेंट मोड में है।
ग्रामीणों का कहना है— “हम अपने जंगल, जमीन और पर्यावरण को किसी कीमत पर नहीं बरबाद होने नहीं देंगे यह अधिकार हमें संविधान ने पेसा कानून देकर प्रदान किया है। रायगढ़ पहुंचने पर जल जंगल जमीन से जुड़े मुद्दों पर मुखर रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी ग्रामीणों को साथ मिला।

अब देखना है की आदिवासियों की मांग आदिवासी मुख्यमंत्री तक पहुंचता है या समूचा तंत्र उद्योगपति के आगे नतमस्तक है। हालाकि 11 नवंबर को होने वाली जनसुनवाई की राह विरोध को देखते हुए आसान प्रतीत नहीं हो रही है। देखना है कि जिला प्रशासन जन सुनवाई को लेकर किस तरह का रुख अख्तियार करती है आने वाले समय में पता चलेगा।

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