सारंगढ़-बिलाईगढ़।
जिले में धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी और किसान हितैषी बनाए रखने के उद्देश्य से कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने सारंगढ़ विकासखंड के विभिन्न धान खरीदी केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने केंद्रों की व्यवस्थाओं, टोकन प्रक्रिया, भौतिक सत्यापन, धान की गुणवत्ता तथा अधिकारियों-कर्मचारियों की उपस्थिति की बारीकी से समीक्षा की। अनियमितता और लापरवाही पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वास्तविक और छोटे किसानों को धान बेचने में किसी भी प्रकार की परेशानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डॉ कन्नौजे ने कनकबीरा धान खरीदी केंद्र का निरीक्षण किया गया, जहां आज 14 किसानों के टोकन कटे। इस केंद्र में इस वर्ष कुल 585 किसान धान विक्रय करते हैं। भौतिक सत्यापन रिपोर्ट की जांच में एक किसान के 108 क्विंटल टोकन के विरुद्ध मात्र 10 क्विंटल धान पाया गया।
कलेक्टर ने बदरा धान नहीं खरीदने तथा सभी समितियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए। मंगलवार को कुल 1200 क्विंटल का टोकन कटा। प्रभारी जगदीश पटेल ने एक किसान का धान खराब होने के कारण वापस करने की जानकारी दी।
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिन किसानों की धान खरीदी पूर्ण हो चुकी है, उनका रकबा समर्पण प्राथमिकता से कराया जाए, ताकि छोटे किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। इसके बाद सेवा सहकारी समिति बोहराबहाल धान खरीदी केंद्र का निरीक्षण किया गया। यहां दो किसानों का टोकन कटा है तथा पिछले 4 दिनों में 1800 क्विंटल का टोकन जारी हुआ है। कलेक्टर ने शेष छोटे किसानों के टोकन शीघ्र काटने के निर्देश दिए। ग्राम करगीपाली निवासी किसान भूपेंद्र पटेल द्वारा लाए गए 33 बोरा धान को सफाई के बाद खरीदने के निर्देश दिए गए। इस केंद्र में 11 गांवों के किसान धान विक्रय करते हैं।
सहसपुर धान खरीदी केंद्र के निरीक्षण में समिति प्रबंधक ने बताया कि आज 22 किसानों के टोकन कटे हैं एवं 19 किसान धान बेचने आए। कलेक्टर ने सभी केंद्रों में पृथक स्टैकिंग की स्थिति की जांच की तथा पटवारी द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन की जानकारी ली।
यहां प्रभारी अनिल गोपाल ने बताया कि कल 5 किसान धान विक्रय हेतु आएंगे, जिनके टोकन पूर्व में काटे जा चुके हैं। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिन किसानों के पास धान उपलब्ध नहीं है, उनका रकबा समर्पण कराया जाए।
“अलग-अलग धान खरीदी केंद्रों का निरीक्षण किया गया, जो भी किसान धान बेचने आए हैं उससे भी चर्चा किया गया। किसी भी प्रकार के कोई समस्या नहीं आ रहा है। उन समितियों में लगभग 98% किसान धान बेच चुके हैं। समिति प्रबंधक के द्वारा जानकारी में बताया गया कि लगभग दो चार किसान ही धान बेचने के लिए बचे हुए हैं और जो वास्तविक किसान है वह सभी किसान धान बेच चुके हैं और सभी समिति प्रबंधक को निर्देशित किया गया कि बदरा और खराब क्वालिटी का धान नहीं लिया जाए और जो भी वास्तविक किसान है उसे धान बेचने में किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

Recent Comments