Saturday, June 13, 2026
Homeआम मुद्देएसईसीएल प्रभावित विस्थापन की मार झेल रहे बरौद के ग्रामीण आज भी...

एसईसीएल प्रभावित विस्थापन की मार झेल रहे बरौद के ग्रामीण आज भी अंधेरे में जिंदगी गुजारने को मजबूर ….किया मांग और कहा अब समाधान नहीं हुआ तो  आंदोलन के लिए होंगे मजबूर 

 

 

 

 

घरघोड़ा। एसईसीएल रायगढ़ क्षेत्र के विस्थापन की मार झेल रहे ग्राम बरौद के ग्रामीण आज भी अंधेरे में जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। विस्थापन के बाद जहां अधिकांश परिवार अपने नए ठिकानों में बसने लगे हैं, वहीं लगभग 15 प्रतिशत किसान अब भी अपनी अर्जन क्षेत्र से बाहर की निजी भूमि पर रह रहे हैं। इन परिवारों को न तो अब तक बिजली सुविधा मिल पाई है, न ही बेहतरीन जीवन की उम्मीदों ने आकार लिया है। ग्राम पंचायत बरौद अंतर्गत करीब 60 भूमिहीन और छोटे किसान परिवार राजस्व वन भूमि पर वर्षों से निवासरत हैं, जबकि 50 से अधिक गरीब परिवार अपने घरों का निर्माण कार्य कर रहे हैं। बावजूद इसके, आज तक किसी को बिजली की रोशनी नसीब नहीं हुई। अंधेरे और असुविधा में जीवन गुजार रहे इन ग्रामीणों ने कई बार स्थानीय बिजली विभाग और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

सोमवार को ग्राम के ग्रामीणों ने सरपंच प्रतिनिधि संतकुमार राठिया के नेतृत्व में विद्युत विभाग घरघोड़ा का रुख किया और विभाग के मुख्य अभियंता को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में ग्रामीणों ने मांग की कि विस्थापित परिवारों और राजस्व भूमि पर निवासरत गरीब परिवारों को तत्काल बिजली कनेक्शन और नया ट्रांसफार्मर उपलब्ध करवाया जाए। उनका कहना है कि एसईसीएल द्वारा विस्थापन की प्रक्रिया में कई परिवारों की उपेक्षा की गई है, जिससे अब उनका जीवन संकट में है।

क्या बोले विभाग के अधिकारी – मुख्य अभियंता, विद्युत विभाग, घरघोड़ा ने इस मामले पर कहा कि ग्रामीणों की शिकायत को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है। जैसे ही आदेश प्राप्त होगा, क्षेत्र में शीघ्र विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

वहीं सरपंच प्रतिनिधि संतकुमार राठिया ने कहा कि “हमने कई बार प्रशासन से आग्रह किया है, पर यदि अब भी समाधान नहीं हुआ तो हमें आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।” उन्होंने बताया कि गांव के बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं की सुरक्षा और दैनिक जीवन सब कुछ बिजली की कमी से प्रभावित हो रहा है।बरौद के ग्रामीणों की यह लड़ाई सिर्फ बिजली के लिए नहीं, बल्कि विकास और समान अधिकारों की मांग का प्रतीक बन चुकी है। अब देखना यह होगा कि विभागीय कार्रवाई कब तक इन अंधेरे में डूबे घरों में रोशनी पहुंचा पाती है।

RELATED ARTICLES

उज्जवला में सब्सिडी की कटौती गरीब महिलाओं को धुएं से मुक्ति और सस्ती रसोई गैस उपलब्ध कराने की योजना के नाम पर गरीब परिवारों...

      रायगढ़ ।  उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी वाले गैस सिलेंडरों की संख्या में कटौती को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी रायगढ़ ने केंद्र सरकार पर...

भ्रष्टाचार ऐसा कि “आटे में नमक मिलाया गया कि नमक में आटा मिलाया गया’ …..करोड़ो रुपए फूंक दिए तालाबों,टारें और जलाशयों के जीर्णोद्धार में…....

    रायगढ़ विधानसभा में सिंचाई विभाग और ठेकेदारों की मिलीभगत से तालाबों के जीर्णोद्धार में हुआ करोड़ों का घोटाला ? मांग है कि जांच बरसात से...

अपनी आत्मकथा के साथ “असमंजस बाबू” रायगढ़ के रंगमंच पर होंगे हाज़िर …. एकल नाटक के लगातार दो मंचन देख सकेंगे नाट्यप्रेमी…..इप्टा के आयोजन...

    हिंदी पट्टी के बेहद चर्चित नाटककार वरिष्ठ रंगकर्मी अख़्तर अली द्वारा 2002 में लिखे गये नाटक "असमंजस बाबू की आत्मकथा" का मंचन 9 जून...

उस्मान के प्रयास से घरघोड़ा बस स्टैंड में भी वाटर फ्रीजर की सौगात …. भीषण गर्मी में राहगीरों को बड़ी राहत 

    घरघोड़ा। भीषण गर्मी के बीच आमजन की सुविधा को ध्यान में रखते हुए घरघोड़ा मुख्य बस स्टैंड में वाटर फ्रीज़र शीतल पेयजल की व्यवस्था...
- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments