Friday, August 28, 2026
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जननायक रामकुमार अग्रवाल की पुण्यतिथि पर नमन जल-जंगल-जमीन की लड़ाई के अमर प्रतीक ….. औद्योगिक घरानों के दबाव के खिलाफ डटकर खड़े रहने वाला रहे चेहरा …. केलो नदी और आदिवासी अधिकारों की रक्षा को लेकर उनके संघर्ष आज भी रायगढ़ की पहचान

 

 

 

शमशाद अहमद

रायगढ़। जिले में जननायक के रूप में पहचाने जाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं पूर्व विधायक रामकुमार अग्रवाल की 28 मार्च को पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। आज ही के दिन वे इस संसार को छोड़ परमात्मा में विलीन हो गए थे लेकिन उनके संघर्ष, विचार और जनहित की लड़ाइयाँ आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।

रामकुमार अग्रवाल सिर्फ एक जनप्रतिनिधि नहीं थे बल्कि वे आम जनता की आवाज थे। खासतौर पर औद्योगिक घरानों को प्राकृतिक संसाधनों की खुली छूट देने के वे घोर विरोधी रहे। जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए उन्होंने जीवनभर संघर्ष किया और कभी समझौता नहीं किया। केलो नदी के पानी को औद्योगिक उपयोग के लिए देने के खिलाफ उनका आंदोलन उस दौर में एक बड़ा जनसंघर्ष बन गया था। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि प्राकृतिक संसाधनों पर पहला हक स्थानीय जनता का है न कि बड़े उद्योगों का। यही कारण था कि वे औद्योगिक घरानों की आंखों में हमेशा खटकते रहे लेकिन उसके इतर वेव आम जनता के दिलों में बसते गए।

औद्योगिक प्रदूषण को लेकर वे हमेशा बेहद मुखर रहे। उन्होंने उस दौर में भी बेखौफ होकर आवाज उठाई जब उद्योगों के खिलाफ बोलना आसान नहीं था। उद्योगों की वजह से बढ़ते प्रदूषण, जल स्रोतों के दोहन और पर्यावरण पर पड़ रहे दुष्प्रभावों को उन्होंने लगातार जनता के सामने रखा। वे मानते थे कि विकास की आड़ में प्रकृति का अंधाधुंध दोहन भविष्य के लिए घातक है। यही कारण था कि उन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा को अपना प्रमुख मुद्दा बनाया और औद्योगिक घरानों द्वारा संसाधनों के मनमाने उपयोग का खुलकर विरोध किया। उनकी आवाज सिर्फ विरोध तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे संतुलित विकास के पक्षधर थे। जहां उद्योग भी चलें लेकिन पर्यावरण और स्थानीय लोगों के अधिकारों की कीमत पर नहीं।

आदिवासियों, किसानों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए उनकी आवाज हमेशा बुलंद रही। उन्होंने न सिर्फ संघर्ष किया बल्कि लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक भी किया। आज भी रायगढ़ में जब जल, जंगल और जमीन की बात होती है, तो रामकुमार अग्रवाल का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए लोगों ने कहा कि जननायक कभी मरते नहीं, वे अपने विचारों और संघर्षों में हमेशा जीवित रहते हैं।

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