Tuesday, April 28, 2026
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धौराभाटा जनसुनवाई स्थल पर रात में भी गूंजती रही प्रतिरोध की आवाज़ें …. कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी से संघर्ष को मिली नई ऊर्जा….राष्ट्रीय सचिव जरिता लेफ़्थलांग, विधायक उमेश पटेल और ग्रामीण अध्यक्ष नागेंद्र नेगी पहुंचे मोर्चे पर ….जिंदल कोल माइंस की जनसुनवाई पर सुबह किस करवट बैठेगा ऊंट…. इंतज़ार में पूरा इलाका

 

तमनार—

तमनार स्थित गारे पेलमा सेक्टर 1 की जनसुनवाई की गूंज पूरे प्रदेश में फेल चुकी है। धौराभाटा में होने वाली जिंदल की कोयला खदान से संबंधित प्रस्तावित जनसुनवाई के विरोध में चल रहा ग्रामीणों का धरना शनिवार देर रात अचानक और भी अधिक सशक्त हो गया, जब कांग्रेस के दिग्गज नेता और राष्ट्रीय सचिव जरिता लेफ़्थलांग, प्रदेश के लोकप्रिय विधायक उमेश पटेल, तथा तमनार के सक्रिय ग्रामीण अध्यक्ष नागेंद्र नेगी अपने पूरे दल-बल के साथ आंदोलनकारी ग्रामीणों के बीच पहुंच गए। उमेश पटेल और अन्य कांग्रेसी नेताओं ने ग्रामीणों से जल जंगल जमीन बचाने की मुहिम का कांग्रेस का समर्थन बताया और जन सुनवाई निरस्त करने की मांग की गई। प्रभावित ग्रामीण ठिठुरती ठंड, अंधेरा और समय की परवाह किए बिना लोग जनसुनवाई के विरोध में डटे हुए हैं। स्थानीय विधायक विद्यावती सिदार ग्रामीणों के साथ लगातार डटी हुई हैं।


तीनों नेताओं ने ग्रामीणों से लंबी बातचीत की, उनकी व्यथा सुनी, उनकी चिंताओं को समझा और कहा कि जल–जंगल–जमीन की लड़ाई सिर्फ एक प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि अस्तित्व से जुड़ा हुआ सवाल है। यही कारण था कि स्थानीय निवासी सुबह से लेकर रात तक, और अब रात से अगले सुबह तक, जनसुनवाई निरस्त करने की मांग के साथ जमीन पर डटे हुए हैं।

इधर रात गहराती जा रही है, आंदोलन और मजबूत होता दिखाई प्रतीत हो रहा है। धरनास्थल पर भारी भीड़ लगातार बनी रही। महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे—सभी बड़ी संख्या में मौजूद थे। किसी के चेहरे पर थकान नहीं थी, बल्कि अपने अधिकारों की रक्षा को लेकर दृढ़ निश्चय साफ देखा जा सकता था।

ग्रामीणों के बीच उमेश पटेल

ग्रामीणों ने नेताओं के सामने स्पष्ट कहा कि वे जल–जंगल–जमीन का सौदा किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे, और जिस तरह से यह जनसुनवाई तय की गई है, वह पूरी तरह जनभावनाओं की अवहेलना है।

कांग्रेस नेताओं ने उठाई ग्रामीणों की आवाज़
विधायक उमेश पटेल ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी लड़ाई को राजनीतिक मंच और प्रशासन दोनों स्तरों पर मजबूती से उठाया जाएगा।

राष्ट्रीय सचिव जरिता लेफ़्थलांग ने भी कहा कि यह केवल तमनार की लड़ाई नहीं है बल्कि आदिवासी अस्मिता और पर्यावरणीय न्याय का बड़ा मुद्दा है। ग्रामीण अध्यक्ष नागेंद्र नेगी ने कहा कि गांव–गांव में जागरूकता फैल चुकी है और अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं है।
तीनों नेताओं की मौजूदगी के कारण ग्रामीणों में उत्साह देखते ही बन रहा था। लोग अपने प्रतिनिधियों को सामने देखकर और मजबूत होकर खड़े हो गए।

सुबह तक क्या होगा—सबकी नजरें प्रशासन के निर्णय पर

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन सुबह तक जनसुनवाई निरस्त करने का आदेश जारी करेगा, या फिर सुबह होते-होते कोई नया समीकरण सामने आएगा?
धरनास्थल पर मौजूद अनेक लोगों ने कहा कि अगर जनसुनवाई निरस्त नहीं हुई, तो सुबह धौराभाटा एक बड़े जनसैलाब का केंद्र बनेगा किन्तु शांतिपूर्ण तरीके से। उसी समय तय होगा कि समीकरण किस करवट बैठेगा—क्या ग्रामीणों की एकजुटता प्रशासनिक फैसले पर भारी पड़ेगी, या प्रशासन अपने तय कार्यक्रम पर अडिग रहेगा।

 


ज्ञात हो कि यह प्रस्तावित जनसुनवाई जिंदल की कोयला खदान परियोजना को लेकर है, जिसके विरोध में प्रभावित गांवों के निवासी पिछले तीन दिनों से आंदोलनरत हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खदान खुलने पर क्षेत्र का पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ जाएगा, विस्थापन बढ़ेगा, खेती चौपट होगी साथ ही उनका अस्तित्व भी संकट में पड़ जाएगा। इसी के मद्देनजर पूरा इलाका एक स्वर में जनसुनवाई का विरोध कर रहा है।

रात में उमड़ी बड़ी भीड़ और कांग्रेसी नेताओं का समर्थन  और प्रशासन के बढ़ते दबाव के बीच अब पूरा क्षेत्र यह देखने के लिए इंतजार कर रहा है कि सुबह क्या फैसला सामने आता है।

क्या यह विरोध प्रशासन को विवश कर देगा? या सुबह जैसे ही सूरज उगेगा, जनसुनवाई से पहले ही समीकरण बदल जाएंगे? हर किसी की निगाहें अब सुबह पर टिकी हैं।

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