बरमकेला।
नगर पंचायत बरमकेला के वार्ड क्रमांक 08 स्थित हॉस्टल पारा बस्ती एवं चन्द्रपुर मुख्य मार्ग की स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से खराब पड़ी थीं। स्थानीय लोगों द्वारा लगातार शिकायत किए जाने के बावजूद जब जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हुई, तब वार्ड पार्षद मनीष नायक ने स्वयं खंभे पर चढ़कर स्ट्रीट लाइट सुधारने का प्रयास किया।
पार्षद मनीष नायक का यह कदम नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधि का यह रूप विरले ही देखने को मिलता है, जब वह केवल समस्याओं को उठाने तक सीमित न रहकर स्वयं उनके समाधान के लिए मैदान में उतर जाए।
मनीष नायक इससे पहले भी अपने जनसेवा के कार्यों को लेकर लगातार सुर्खियों में रहे हैं। हाल ही में भीषण गर्मी के दौरान जब कई इलाकों में पानी की समस्या गहराई थी, तब वे देर रात करीब 2 बजे तक टैंकर लेकर वार्डवासियों को पेयजल उपलब्ध कराते नजर आए थे। जनता के प्रति उनकी यही संवेदनशीलता उन्हें अन्य जनप्रतिनिधियों से अलग पहचान दिलाती है।
हालांकि इस घटना ने एक गंभीर सवाल भी खड़ा कर दिया है। यदि खंभे पर चढ़कर स्ट्रीट लाइट सुधारते समय कोई हादसा या अनहोनी हो जाती, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती? आखिर जिन कार्यों के लिए संबंधित विभाग और कर्मचारी नियुक्त हैं, उस काम को करने के लिए एक जनप्रतिनिधि को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ी …यह चिंतनीय विषय है ?
वार्डवासियों का कहना है कि मनीष नायक केवल वादे नहीं करते, बल्कि हर छोटी-बड़ी समस्या के समाधान के लिए स्वयं आगे आते हैं। यही कारण है कि लोगों के बीच उनकी छवि एक कर्मठ, जुझारू और समर्पित जनप्रतिनिधि की बन चुकी है।
जनप्रतिनिधि होने के नाते अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाने वाले मनीष नायक कई बार जनता की सुविधा के लिए अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना काम करते दिखाई देते हैं। उनका मानना है कि जनता ने जिस भरोसे के साथ उन्हें चुना है, उस भरोसे पर खरा उतरना ही उनका पहला दायित्व है।
इस वार्ड वासियों का कहना है कि जनसेवा का वास्तविक अर्थ केवल भाषण देना नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में लोगों के साथ खड़े होकर उनकी समस्याओं का समाधान करना है। पार्षद मनीष नायक का यह समर्पण और सेवा भाव उन्हें जनता के बीच एक बेहतरीन इंसान, जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और वार्ड के लिए “अजेय योद्धा” के रूप में स्थापित करता है।

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