रायगढ़। छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार के मंत्रिमंडल में जिन तीन नए मंत्रियों के भविष्य का उदय हुआ उनके भविष्य के कार्यों को लेकर उनके राजनीतिक भविष्य के पथ की निर्धारिता होगी पर इस मंत्रिमंडल के गठन को लेकर जिस प्रकार राफेल विमान की गति से भागने की स्पीड में देश की मोदी सरकार और प्रदेश की विष्णु देव की सरकार चलने के प्रदर्शन कर रही थी उसे छत्तीसगढ़ सरकार में 3 मंत्री को बनाए जाने के लिए पौने 2 साल लगा दिए निर्णयों की असमंजस्यता ने बीते पौने 2 साल में रोज नए नए नामों में उहापोह की स्थिति में बीजेपी के सीनियर विधायकों विरुद्ध जूनियर विधायकों का दंगल छत्तीसगढ़ की राजनीति में देखने को मिला।

पहले तो ये कहा जाता था कि भाजपा में निर्णय जमीनी स्तर पर होती है पर सूत्रों के अनुसार नए मंत्रियों के नामों को डबल इंजन की सरकार ने फाइनल किया यह सर्वविदित है। बीजेपी कार्यकर्ताओं के अनुसार इस बात की खुशी तो है कि आखिर मंत्रिमंडल का पूर्ण रूप से गठन हुआ पर कार्यकर्ताओं के मध्य जनसंघ और बीजेपी के जमाने के धुरंधर नेताओं में लखीराम अग्रवाल के अवदानो को भुलाने की स्थिति को बना सा दिया है।
छत्तीसगढ़ बीजेपी सरकार के मंत्रीमंडल में लखीराम अग्रवाल के कर्मठ पुत्र और पूर्व मंत्री वर्तमान बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल का नहीं होना इस बात की ओर इंगित करता है कि निश्चित ही भाजपा अपनी योजनाओं को लेकर 2047 की ओर चल पड़ी है ?

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