Wednesday, October 14, 2026
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छलका दर्द : ग्रामीणों ने एसईसीएल प्रबंधन को सौंपा ज्ञापन ….साहब इनका क्या दोष प्रभावित होकर भटक रहे …इस लिहाज से पात्रता की श्रेणी में लिया जाना चाहिए …और विस्थापन लाभ में 55 परिवारों को अलग दर्जा देकर लाभ प्रदान किया जाना चाहिए 

तब सभी 3 से 15 साल के थे और अब 18 से 30 वर्ष के हो गए हैं इनका क्या कुसूर हैं तो ये भी प्रभावित

रायगढ़ : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के घरघोड़ा तहसील अंतर्गत ग्राम बरौद के प्रभावित ग्रामीणों ने आज उपक्षेत्रीय प्रबंधक, बरौद उपक्षेत्र को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) द्वारा किए जा रहे भू-अर्जन और विस्थापन से प्रभावित युवाओं को पुनर्वास लाभ प्रदान करने की मांग की गई है।

 

ग्रामीणों का कहना है कि 2010 की अधिसूचना के बाद 16 वर्ष बीत चुके हैं, जिससे कई परिवारों के युवा सदस्य अब अलग परिवार की श्रेणी में आ चुके हैं, लेकिन उन्हें लाभ नहीं मिल पा रहा है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि ग्राम बरौद में एसईसीएल की बरौद विस्तार खुली खदान परियोजना के लिए कोयला धारक क्षेत्र (अर्जन एवं विकास) अधिनियम 1957 की धारा 9(1) के तहत अधिसूचना एस-ओ-3133 का प्रकाशन भारत के राजपत्र में 25 दिसंबर 2010 को हुआ था। इसके आधार पर 331 परिवारों की सूची 2016 में छत्तीसगढ़ स्टेट अथॉरिटी द्वारा प्रमाणित और राजस्व अधिकारी घरघोड़ा द्वारा सत्यापित की गई थी।

एसईसीएल प्रबंधन ने 9 जून 2018 को इन परिवारों के लिए विस्थापन लाभ की सूची तैयार कर अवार्ड पारित किया था। हालांकि, विस्थापन की प्रक्रिया 2026 के बाद होने से कई परिवारों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, 2010 में जिन बच्चों की उम्र 3 से 15 वर्ष थी, वे अब 18 से 30 वर्ष के हो चुके हैं। ये युवा भूमिहीन हैं, भू-अर्जन से मुख्य रूप से प्रभावित हैं और घर से बेघर होने वाले हैं।

अधिकांश आदिवासी और अति गरीब श्रेणी के हैं, जो अलग-अलग परिवार बनाकर जीवन यापन कर रहे हैं। कुछ परिवारों में तो बाल-बच्चे भी हो चुके हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि ऐसे 55 परिवारों को अलग परिवार का दर्जा देकर विस्थापन लाभ प्रदान किया जाए, ताकि वे विकास की मुख्य धारा से जुड़ सकें और अपनी वर्तमान स्थिति से बेहतर जीवन जी सकें।

 

ज्ञापन में कोल इंडिया लिमिटेड की पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन नीति 2012 का हवाला देते हुए कहा गया है कि नीति गरीबों और विस्थापित परिवारों के हित में नहीं है, इसलिए इसमें संशोधन कर लाभ सुनिश्चित किया जाए। ग्रामीणों ने प्रबंधन से मांग की है कि इन 55 परिवारों के लिए सर्वे कराकर विस्थापन लाभ देने का आदेश जारी किया जाए।

उपक्षेत्रीय प्रबंधक ने ज्ञापन प्राप्त करने की पुष्टि की है और कहा है कि मामले की जांच की जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे आंदोलन करेंगे। यह मुद्दा क्षेत्र में विस्थापन और पुनर्वास की लंबित समस्याओं को फिर से उजागर कर रहा है, जहां आदिवासी समुदाय सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है।

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