Saturday, August 29, 2026
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खनन प्रभावित एवं आदिवासी क्षेत्रों की  1583 छात्रावासी बालिकाओं का होगा एचपीवी टीकाकरण …. गर्भाशय ग्रीवा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से होगा बचाव ……ह्यूमन पैपिलोमा वायरस से बचाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम 

 

रायगढ़।

रायगढ़ जिले में बालिकाओं के स्वास्थ्य संरक्षण को लेकर एक सराहनीय पहल की जा रही है। जिले के शासकीय आश्रमों एवं छात्रावासों में अध्ययनरत 9 से 14 वर्ष आयु वर्ग की 1583 बालिकाओं को जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) के माध्यम से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) से बचाव का टीका लगाया जाएगा। यह पहल गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की रोकथाम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जिले के आश्रमों एवं   छात्रावासों में अध्ययनरत अधिकांश बालिकाएँ वनांचल, खनन प्रभावित एवं आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों से आती हैं, जहाँ स्वास्थ्य जागरूकता तथा निवारक चिकित्सा सुविधाओं तक पहुँच सीमित रही है। कार्यक्रम का उद्देश्य इन बालिकाओं को समय रहते आवश्यक स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराना है। इसके अंतर्गत अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं सामान्य वर्ग की छात्रावासीन बालिकाएँ भी लाभान्वित होंगी।
चिकित्सकीय विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं में होने वाले गर्भाशय ग्रीवा कैंसर का प्रमुख कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस संक्रमण है। यह रोग प्रारंभिक अवस्था में स्पष्ट लक्षण न होने के कारण देर से पहचान में आता है, जिससे उपचार जटिल हो जाता है। विशेषज्ञों द्वारा 9 से 14 वर्ष की आयु में एचपीवी टीकाकरण को प्रभावी एवं सुरक्षित माना गया है। कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक बालिका को एचपीवी टीके की दो खुराक दी जाएंगी। पहली खुराक के छह माह पश्चात दूसरी खुराक दी जाएगी। टीकाकरण कार्य मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, रायगढ़ के मार्गदर्शन में प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा पूरी सुरक्षा एवं सावधानी के साथ संपन्न कराया जाएगा। प्रति बालिका टीकाकरण की अनुमानित लागत लगभग 1800 रुपए होगी, जिसका वहन जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) से किया जाएगा। आश्रमों एवं छात्रावासों में निवासरत अनेक बालिकाएँ ऐसी पारिवारिक पृष्ठभूमि से आती हैं, जहाँ स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता, नियमित जांच एवं निवारक चिकित्सा सुविधाओं का अभाव रहा है। विशेषकर वनांचल एवं दूरस्थ क्षेत्रों में सर्वाइकल कैंसर जैसे गंभीर रोगों के प्रति जानकारी की कमी एक बड़ी चुनौती रही है। यह पहल खनन प्रभावित एवं आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में निवासरत बालिकाओं के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी और दूरदर्शी कदम सिद्ध होगी। मातृ शक्ति की सुरक्षा एवं संरक्षण हेतु किया जा रहा यह प्रयास न केवल रायगढ़ जिले, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बनेगा।

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