रायगढ़। राज्य शासन द्वारा हाल ही में ग्राम पंचायत तमनार एवं बासनपाली को नगर पंचायत का दर्जा देने तथा 7 सदस्यीय समन्वय समिति के गठन के आदेश के विरुद्ध दायर याचिका पर माननीय उच्च न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश दिए जाने के बाद स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। न्यायालय के आदेश के परिपालन के लिए दोनों पंचायतों के जनप्रतिनिधियों और कांग्रेस पदाधिकारियों ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर आदेश की प्रति सौंपते हुए पंचायत कार्यों के पूर्ववत संचालन की मांग की गई।

शासन द्वारा जारी अधिसूचना के माध्यम से तमनार एवं बासनपाली ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत में विलय कर 7 सदस्यीय समन्वय समिति का गठन किया गया था। इस निर्णय के विरोध में दोनों पंचायतों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने अधिवक्ता के माध्यम से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने शासन के आदेश पर स्थगन प्रदान कर दिया है।
शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष शाखा यादव ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताते हुए कहा कि दोनों पंचायतों में कांग्रेस समर्थित जनप्रतिनिधि निर्वाचित हैं, जिनका निर्वाचन लगभग एक वर्ष पूर्व ही हुआ है। ऐसे में उन्हें पद से हटाकर नगर पंचायत एवं समन्वय समिति का गठन करना सरासर गलत है। उन्होंने इसे जनादेश का अपमान करार दिया।
तमनार पंचायत की सरपंच गुलापी सिदार ने कहा कि न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से पंचायत प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर को आदेश की प्रति सौंपकर ग्राम पंचायत के कार्यों को पूर्ववत संचालित रखने की मांग की है।
वरिष्ठ कांग्रेसी विकास शर्मा ने भी इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि तमनार ब्लॉक आदिवासी क्षेत्र है, जहां इस प्रकार का निर्णय स्थानीय जनभावनाओं के विपरीत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी पंचायत पदाधिकारियों के निर्णय के साथ खड़ी है।
कलेक्टर से मुलाकात करने गए प्रतिनिधिमंडल में शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष शाखा यादव, वरिष्ठ कांग्रेसी विकास शर्मा, तमनार पंचायत की सरपंच गुलापी सिदार, बासनपाली की सरपंच सविता ठाकुर, महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष रानी चौहान, शहर कांग्रेस महामंत्री रवि पांडेय, माणिक पटनायक, बसंत पटनायक, जगन्नाथ सिदार, अभिषेक शर्मा, बादल साहू, मंजू पटनायक, बबलू साहू सहित तमनार और बासनपाली के पंचगण उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश के बाद फिलहाल ग्राम पंचायतों के कार्य पूर्ववत संचालित रहेंगे जिससे स्थानीय प्रशासनिक गतिविधियों में स्थिरता बनी रहेगी।

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