Wednesday, June 17, 2026
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उद्योगों की मनमानी पर कांग्रेस का वार मनमानी करने वाले उद्योगों पर पहले लगे ताला ….प्रदूषण, श्रमिक शोषण और सुरक्षा लापरवाही पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष का हमला….. कहा– पहले जवाबदेही तय हो फिर मिले संचालन की अनुमति

 

रायगढ़।

जिले में लगातार सामने आ रही औद्योगिक मनमानी, पर्यावरण प्रदूषण, फ्लाई एश की गंभीर समस्या, काले डस्ट और श्रमिक शोषण के मामलों को लेकर कांग्रेस ने अब आक्रामक रुख अपना लिया है। प्रदेश कांग्रेस के निर्देश पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष शाखा यादव ने उद्योगों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए स्पष्ट कहा है कि अब जिंदगी से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और बिना समुचित जांच के किसी भी उद्योग को संचालन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।


शाखा यादव ने टीआरएन, व्हीएस इस्पात, सुनील इस्पात, शिव शक्ति, सिंघल इंटरप्राइजेज, सारडा एनर्जी और सालासर जैसे उद्योगों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ये कंपनियां एक ओर सामाजिक कल्याण के नाम पर वाहवाही लूट रही हैं, वहीं दूसरी ओर जल, जंगल, जमीन और मानव जीवन के साथ खुलेआम खिलवाड़ कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उद्योग संचालक खुद एसी दफ्तरों, घरों और गाड़ियों में सुरक्षित जीवन जी रहे हैं, जबकि आम जनता औद्योगिक प्रदूषण के साये में काले डस्ट को जहर की तरह अपने शरीर में झेलने को मजबूर है। जिले में कैंसर रोग के डॉक्टरों की आमद रफ्त में संकेत दे दिया है कि जिले में कैंसर के मारियो की संख्या में इजाफा हो रहा है।

उन्होंने कहा कि जिले में फ्लाई एश की खुलेआम डंपिंग, ईएसपी मशीनों को बंद कर जहरीला धुआं छोड़ना और सुरक्षा मानकों की अनदेखी आम बात हो गई है। इसके चलते हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है और कैंसर, फेफड़ों के संक्रमण व त्वचा रोग जैसी गंभीर बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। पेड़-पौधों तक पर काले धूल की परत जम चुकी है, जिससे पर्यावरण संतुलन पूरी तरह बिगड़ता जा रहा है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने स्थानीय रोजगार के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि उद्योगों में बाहरी लोगों को प्राथमिकता देकर स्थानीय युवाओं के अधिकारों का हनन किया जा रहा है, जिससे जिले में बेरोजगारी और सामाजिक सुरक्षा का असंतुलन दोनों बढ़ रहे हैं। श्रमिकों की स्थिति को लेकर उन्होंने कहा कि ठेका प्रथा के तहत काम कर रहे मजदूरों का खुलेआम शोषण किया जा रहा है। उन्हें न तो समुचित मेडिकल सुविधाएं मिल रही हैं और न ही ईपीएफ जैसी वैधानिक सुविधाओं का नियमित भुगतान हो रहा है। श्रम कानूनों का उल्लंघन करते हुए उद्योग प्रबंधन श्रमिकों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं, जबकि श्रम विभाग की भूमिका पूरी तरह निष्क्रिय नजर आ रही है। औद्योगिक स्वास्थ्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण विभाग और श्रम विभाग और जल संसाधन विभाग द्वारा महज खाना पूर्ति की वजह से महज मामूली अर्थदंड देकर बच निकलने वालों पर बच निकलने वालों पर उन्होंने मांग की है कि पहले जमीनी स्तर पर सख्त जांच करे और दोषी उद्योगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करे।

शाखा यादव ने प्रशासन और संबंधित विभागों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पर्यावरण और औद्योगिक सुरक्षा विभाग की ढिलाई के कारण ही उद्योगों के हौसले बुलंद हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि शिव शक्ति, सिंघल, सालासर, टीआरएन और सारडा इंतजी जैसे प्लांटों पर जिला प्रशासन पहले ताला लगाए फिर उसके बाद3 निष्पक्ष जांच कराई जाए और जब तक ये प्रदूषण नियंत्रण, श्रमिक सुरक्षा और फ्लाई एश के निपटान की समुचित व्यवस्था भूल जल दोहन जैसे संसाधनों के दुरुपयोग पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं करते तब तक इन्हें बंद रखा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि फ्लाई एश के वैज्ञानिक निपटान की व्यवस्था, भूजल दोहन पर नियंत्रण और सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित होने के बाद ही उद्योगों को दोबारा संचालन की अनुमति दी जानी चाहिए।

अंत में उन्होंने दो टूक कहा कि अगर प्रशासन ने समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए, तो कांग्रेस सड़क से लेकर जनआंदोलन तक हर स्तर पर लड़ाई लड़ने को तैयार है।

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