Friday, August 28, 2026
Homeआम मुद्देज़हर उगलती चिमनियां प्रशासन मौन .....जिंदल स्टील एंड पावर पतरापाली में खुलेआम...

ज़हर उगलती चिमनियां प्रशासन मौन …..जिंदल स्टील एंड पावर पतरापाली में खुलेआम उड़ रहा काला धुआं… पर्यावरण नियमों की उड़ रही धज्जियां… जल जंगल ज़मीन के साथ मानव जीवन पर गंभीर खतरा

 

रायगढ़।
औद्योगिक विकास के नाम पर जिले की आबोहवा में लगातार ज़हर घोला जा रहा है। जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड पतरापाली रायगढ़ की चिमनियों से दिन के उजाले में निकलता घना काला धुआं इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि पर्यावरण सुरक्षा को लेकर बड़े उद्योग केवल कागज़ी दावे कर रहे हैं। कंपनियों द्वारा यह कहा जाता है कि ईएसपी (ESP) मशीनें चालू रहती हैं और प्रदूषण नियंत्रित है लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नज़र आ रही है।

बोतलदा डेम के पास से ली गई धुंआ उगलती तस्वीर

ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार और सामने आई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह फैक्ट्री की चिमनियों से काला धुआं निकलकर आसपास के वातावरण में फैल रहा है। यह धुआं न केवल हवा को जहरीला बना रहा है, बल्कि आसपास के गांवों, खेतों और जंगलों को भी अपनी चपेट में ले रहा है। सवाल यह उठता है कि जब इतनी बड़ी और नामचीन औद्योगिक इकाइयां खुलेआम प्रदूषण फैला रही हैं तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रशासन की भूमिका क्या केवल मूकदर्शक की रह गई है?

विशेषज्ञों के अनुसार काले धुएं में मौजूद सूक्ष्म कण (PM2.5, PM10), सल्फर डाइऑक्साइड और अन्य जहरीली गैसें सांस के ज़रिये सीधे मानव शरीर में प्रवेश करती हैं। इसके प्रभाव से दमा, सांस की बीमारी, फेफड़ों के संक्रमण, हृदय रोग, आंखों में जलन, त्वचा रोग और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर इसका प्रभाव और भी घातक साबित हो सकता है।

वहीं पर्यावरणीय दृष्टि से यह प्रदूषण जल स्रोतों को दूषित कर रहा है, फसलों की उत्पादकता घटा रहा है और जंगलों की जैव विविधता को नुकसान पहुंचा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि धुएं और धूल की वजह से सांस लेना मुश्किल हो गया है, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या शासन-प्रशासन इन औद्योगिक घरानों के दबाव में आंख मूंदे बैठा है, या फिर जनता के स्वास्थ्य और पर्यावरण की कीमत पर विकास की यह कहानी यूं ही चलती रहेगी? जरूरत है कि जिम्मेदार विभाग तत्काल जांच कर सख्त कार्रवाई करें, ताकि रायगढ़ की आबोहवा और लोगों की ज़िंदगी को बचाया जा सके।

 

क्या कहते हैं 

राजेश त्रिपाठी
सामाजिक कार्यकर्ता

रायगढ़ के सभी उधोग और कोयला खदान जहर उगल रहीं हैं रायगढ़ की जनता की जिंदगी टी वी दमा कैंसर जैसी बीमारियों जद में है अब अगर रायगढ़ की जनता बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ आवाज नहीं उठायें तो रायगढ़ नहीं बचेगा ।

RELATED ARTICLES

30,000 टन सालाना उत्पादन क्षमता वाला संयंत्र 100% हरित ऊर्जा से संचालित होगा…वायर एवं केबल, पॉलिमर इंसुलेटर, थर्मल इंसुलेशन और ईवी क्षेत्र की बढ़ती...

  बेलगावी। आदित्य बिड़ला समूह की प्रमुख धातु कंपनी हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने कर्नाटक के बेलगावी में देश का पहला सुपरफाइन PPT ATH (Precipitated Aluminium...

मेगा हेल्थ कैंप एवं रक्तदान कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न, बड़ी संख्या में लोगों ने उठाया स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ… अतिथियों ने कहा इस तरह के...

    रायगढ़। पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के विलादत दिवस जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर ऑल मुस्लिम वेलफेयर फाउंडेशन, रायगढ़ एवं जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी कमेटी,...

राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित होंगी छत्तीसगढ़ से जिले की शिक्षिका सुनीता यादव ….छत्तीसगढ़ से एक मात्र इसलिए हुआ चयन …

  सारंगढ़ बिलाईगढ़/ राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान 2026 के लिए सारंगढ़- बिलाईगढ़ जिले की शिक्षिका सुनीता यादव का छत्तीसगढ़ से एकमात्र चयन किया गया है। उन्हें शिक्षक...

देश की 22 प्रतिशत यादव आबादी का बंटवारा मंजूर नहीं- यादव महासभा….कलेक्टर से मुलाकात कर कॉलम एक करने की मांग… कहा अंग्रेजों ने साज़िश...

      रायगढ़। छत्तीसगढ़ यादव महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने  कलेक्टर से मुलाकात कर आगामी जाति जनगणना में यादव समाज की विभिन्न उपजातियों को अलग अलग दर्ज...
- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments