Saturday, August 29, 2026
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वन विभाग में करोड़ों के घोटाले की गूंज……. सदन से निकल सड़कों तक उठा सवाल ….विधानसभा में धरमलाल कौशिक के सवाल से खुली परतें….मुनादी डॉट कॉम ने किया उजागर तो महकमे में मचा हड़कंप ..

 

 

रायगढ़।
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के  रायगढ़ वन मंडल में करोड़ों रुपये के कथित घोटाले ने न केवल प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है बल्कि यह मामला अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र भी बन गया है। मामला उस समय सुर्खियों में आया जब धरमलाल कौशिक ने इसे विधानसभा के पटल पर उठाया। सदन में सवाल उठते ही वर्षों से दबे पड़े तथ्यों की परतें खुलने लगीं और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए।

विधानसभा में मुद्दा उठने के बाद मुनादी डॉट कॉम ने इस पूरे मामले को अपनी बेब न्यूज द्वारा तथ्यों और आंकड़ों के माध्यम से उजागर किया। इसके बाद से ही पूरे वन विभाग में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। मामला उजागर होने के बाद हर जगह वन विभाग का यह घोटाला चर्चा का विषय बना हुआ है।

वन विभाग पर आरोप है कि योजनाओं, कार्यों और भुगतान की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। जैसे ही यह विषय सदन में आया, विभागीय स्तर पर जांच की बात कही गई लेकिन जांच ही पूरी तरह संदेहों में आ गई।

मुनादी डॉट कॉम की रिपोर्ट के सामने आने के बाद मामला और भी गंभीर हो गया। रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों ने यह उजागर कर दिया कि यह केवल एक प्रकरण नहीं, बल्कि एक सुनियोजित तंत्र का हिस्सा हो सकता है। इसके बाद से ही विभाग के भीतर मैनेजमेंट का दौर तेज हो गया और जांच के माध्यम से नुकसान नियंत्रित करने और थोपने की कोशिशें शुरू हो गईं।

सूत्रों के अनुसार, अब सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि घोटाला हुआ या नहीं, बल्कि यह है कि इसकी सच्चाई किस हद तक सामने आएगी। आरोप लग रहे हैं कि “सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे” की तर्ज पर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की रणनीति बनाई जा रही है। यही वजह है कि वन विभाग की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है।

इस पूरे प्रकरण ने यह भी उजागर कर दिया है कि यदि एक मामले में करोड़ों के घोटाले की आशंका है, तो विभाग के भीतर और कितनी अनियमितताएं दबी हो सकती हैं। जानकारों का मानना है कि बिना स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के सच्चाई सामने आना मुश्किल है।

फिलहाल यह मामला वन विभाग के लिए एक बड़े मुद्दे के रूप में खड़ा हो चुका है। अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या केवल औपचारिक कार्रवाई होगी या वास्तव में जिम्मेदारों तक जांच की आंच पहुंचेगी। सच क्या है और दोषी कौन, यह तो आने वाली जांच ही तय करेगी, लेकिन इतना तय है कि इस घोटाले ने व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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