Saturday, August 29, 2026
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धान खरीदी में खुला खेल फर्रुखाबादी,40 किलो से कम वजन के सिले बोरे ने खोली पोल …..टेन्डा नवापारा, कुड़ुमकेला और लारीपानी समितियों में ‘असली किसान’ का धान खारिज कोचियों का धान पास …?

 

 

 

रायगढ़।

 

जिले के टेन्डा नवापारा, कुड़ूमकेला, उपकेंद्र घरघोड़ी और लारीपानी सेवा सहकारी समिति धान खरीदी केंद्रों में धान खरीदी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां धान खरीदी की प्रक्रिया किसानों के लिए राहत नहीं, बल्कि भय और अपमान का कारण बनती जा रही है। असली किसान कटौती, खराबी और मिक्स धान के नाम पर दर-दर भटक रहा है, जबकि कोचियों-व्यापारियों का धान चुपचाप “सोना” बनकर समितियों में खपाया जा रहा है। इन सबकी पोल कुछ किसानों ने उनका नाम गांव न छापने की शर्त पर पोल खोल तस्वीर भेजकर बताया है।

किसानों का आरोप है कि समितियों में 40.600 किग्रा से कम वजन वाले बोरे सीधे सीधे बाहरी धान है। 39.510 किग्रा वजन के सिले हुए बोरे समिति परिसर में इस बात की गवाही देती है कि यह धान बाहरी धान है। जो किसी भी नियम और तर्क से मेल नहीं खाते।किसानों ने अपना शक दूर करने के लिए समिति के लोगों की नजरों से बचकर फड़ के पास रखे कांटे पर ऐसे बोरे तौलकर देखे, तो दो अलग- अलग बोरों में वजन 40 किलो से कम 39.510 किग्रा पाया गया। यह तथ्य इस बात की ओर सीधा इशारा करता है कि बाहरी धान को आनन-फानन में हड़बड़ी में सेट किया गया है ताकि किसी को कानोकान भनक तक नहीं लगी। किसानों का यह भी कहना है कि कहीं से भी हजम होने वाली बात नहीं है कि यह किसान का ही धान है, क्योंकि ये कहीं से भी संभव नहीं है हर किसान इस बात की गवाही देगा कि धान की तौल में वजन 40.600 किग्रा से कम तो हो ही नहीं सकता है।

कटौती और रिजेक्शन की दहशत, बोलने से डर रहे लोग/-

किसानों का कहना है कि यदि यह धान वास्तविक किसानों का होता, तो बोरे का वजन 41.720 से 41.780 किग्रा के आसपास होता, जैसा कि सामान्यतः होता है। लेकिन 40 किलो से कम वजन वाले सिले हुए बोरे यह साबित करते हैं कि समिति परिसर में रखा पूरा लॉट ही संदेहास्पद और अवैध प्रतीत होता है। फोटो में साफ दिखाई देता है कि बोरा सिला हुआ है, यानी यह नहीं कहा जा सकता कि बोरी खुली थी या वजन बाकी था। क्षेत्र के किसानों ने नाम और गांव उजागर न करने की शर्त पर जानकारी और फोटो उपलब्ध कराई। किसानों का साफ कहना था कि नाम छप गया तो हम दिक्कत में आ जायेंगे मेरे साथ दूसरे किसान साथी भी परेशान होंगे वैसे भी किसान कई तरह से परेशान होते रहे है। वर्तमान में कटौती के साथ खराब क्वालिटी खराब बताकर रिजेक्शन का भय भी बना हुआ है। किसान बस किसी तरह से अपना मेहनत की फसल को कैसे भी करके बेचना चाहता है वह किसी पचेड़े में फंसना नहीं चाहता है। कटौती क्वालिटी और अन्य तरीके मिलावटी खराब पाखर आदि के नाम से रिजेक्शन के भय ने किसानों को खामोश रहने पर मजबूर कर दिया है।

एक जानकारी के अनुसार 40.600 किग्रा से ऊपर 41.720 से लेकर 41.780 कुछ जगहों पर कुछ किसानों के तौल 42 किग्रा तक ले रहे है धान तौल को लेकर कोई मापदंड नहीं है। पूर्वांचल क्षेत्र के एक किसान के अनुसार कोचियों का धान कब, कैसे और किसके संरक्षण में खप जाता है किसी को कानों कान खबर तक नहीं लगती है सीसी टीवी के कैमरों में भी आप नहीं पकड़ सकते। हालांकि कुछ किसानों की यह पोल खोल फोटो ने इन जैसी कुछ समिति प्रबंधकों की मनमानी रवैया उजागर अमानवीय चेहरा के साथ भ्रष्टाचार को उजागर करता है।

 

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