Friday, August 28, 2026
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डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 36.97 लाख की ठगी….. रायगढ़ पुलिस की त्वरित कार्रवाई से 2 लाख रुपये हुआ होल्ड……एसएसपी शशि मोहन सिंह की अपील ..कोई एजेंसी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती सतर्क रहें

 

 

रायगढ़। जिले में साइबर अपराध का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर ठगों ने विद्युत विभाग के एक सेवानिवृत्त परिवेक्षक से 36 लाख 97 हजार 117 रुपये की ठगी कर ली। मामले की शिकायत मिलते ही रायगढ़ पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए कार्रवाई की और लगभग 2 लाख रुपये तत्काल होल्ड कराने में सफलता हासिल की।

पीड़ित ने 17 फरवरी 2026 को साइबर थाना रायगढ़ में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिस पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 02/2026 धारा 308(6), 318(4) भारतीय न्याय संहिता एवं 66(D) आईटी एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच प्रारंभ कर दी है।

ऐसे रची गई साजिश/-
पीड़ित जो जनवरी 2022 में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत परेषण कंपनी से परिवेक्षक पद से सेवानिवृत्त हुए थे, को 14 जनवरी 2026 को एक अज्ञात महिला का कॉल आया। कॉल करने वाली ने स्वयं को टेलीकॉम अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके पहचान पत्र का दुरुपयोग कर मोबाइल नंबर लेकर गैरकानूनी गतिविधियां की जा रही हैं।

इसके बाद कॉल को कथित पुलिस अधिकारी और दिल्ली के थाने के फर्जी अधिकारी से जोड़ दिया गया। ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी। फिर एक व्यक्ति ने वीडियो कॉल पर स्वयं को आईपीएस अधिकारी बताकर “डिजिटल अरेस्ट” का भय दिखाया और जांच के नाम पर बैंक खातों एवं संपत्ति की जानकारी हासिल कर ली।

डर और मानसिक दबाव में आकर पीड़ित ने 30 जनवरी से 11 फरवरी 2026 के बीच अलग-अलग खातों में कुल 36,97,117 रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में परिजनों को जानकारी होने पर ठगी का खुलासा हुआ।

पुलिस की तत्परता से मिली आंशिक राहत/-
साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक नासिर खान ने बताया कि शिकायत मिलते ही संबंधित बैंक खातों में ट्रांजैक्शन को ट्रैक कर लगभग 2 लाख रुपये होल्ड कराए गए। साथ ही अन्य खातों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने नागरिकों से अपील करते हुए स्पष्ट कहा कि “पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा कभी भी मोबाइल या वीडियो कॉल के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट नहीं किया जाता। जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश देना पूरी तरह साइबर ठगी है।

उन्होंने आमजन से आग्रह किया कि किसी भी संदिग्ध कॉल पर अपनी बैंकिंग या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराएं।
रायगढ़ पुलिस की सजगता और त्वरित कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित किया है कि समय रहते शिकायत करने पर साइबर अपराध में भी राहत संभव है।

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