Tuesday, October 13, 2026
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NR इस्पात–CSIDC जमीन विवाद में नया मोड़ ……भाजपा नेताओं को ‘कोयला घोटाले के पैसे’ के इस्तेमाल का शक….. विधानसभा में उठे सवाल और जांच की आहट….

 

 

रायगढ़ । NR इस्पात को CSIDC द्वारा दी गई जमीन का मामला अब सिर्फ प्रक्रियागत अनियमितता तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इस पर छत्तीसगढ़ के चर्चित कोयला घोटाले के धन के इस्तेमाल को लेकर भी संदेह जताया जाने लगा है। भाजपा नेताओं का दावा है कि इस प्रोजेक्ट में लगाए गए निवेश के स्रोत संदिग्ध हैं और इसकी कड़ियां पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सामने आए कथित कोयला घोटाले से जुड़ सकती हैं।

इस गंभीर आशंका को लेकर भाजपा विधायक पुरंदर मिश्र ने विधानसभा में प्रश्न लगाकर जमीन आबंटन, MOU, मूल्य निर्धारण और उद्योग को दी गई रियायतों की पूरी जानकारी मांगी है। पार्टी के भीतर यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि आखिर किस आधार पर NR इस्पात को इतनी तेजी से सभी मंजूरियां दी गईं।

2018 के बाद बढ़ी नजदीकियां, संदेह गहराया

भाजपा सूत्रों का कहना है कि 2018 में सत्ता परिवर्तन के बाद जब भूपेश बघेल मुख्यमंत्री बने, उसी समय से NR इस्पात प्रबंधन और सरकार के बीच नजदीकियां असामान्य रूप से बढ़ीं। निवेश MOU से लेकर CSIDC के जरिए जमीन आबंटन तक की तमाम सरकारी प्रक्रियाएं रिकॉर्ड समय में पूरी कर दी गईं, जबकि आम तौर पर यही प्रक्रियाएं वर्षों तक लंबित रहती हैं।

इसी तेजी ने अब कई सवाल खड़े कर दिए हैं—

क्या जमीन आबंटन में नियमों से हटकर उद्योग को लाभ दिया गया?

क्या मूल्य निर्धारण में सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया गया?

और सबसे बड़ा सवाल—क्या इस प्रोजेक्ट में कोयला घोटाले से जुड़े धन का निवेश किया गया?

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा

बताया जा रहा है कि इस आशंका को लेकर राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ सामाजिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, अब तक यह बातें संदेह और अटकलों तक ही सीमित हैं और किसी भी जांच एजेंसी ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

सरकार का रुख सख्त 

भाजपा सरकार के सूत्रों का कहना है कि यदि विभागीय जवाबों में प्रक्रियागत लापरवाही या नियमों से हटकर लाभ देने के प्रमाण मिलते हैं, तो इस पूरे मामले में विस्तृत जांच तय मानी जा रही है। सरकार पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल में हुए औद्योगिक MOU और जमीन आबंटन की फाइलें खंगालने के मूड में दिखाई दे रही है।

कांग्रेस के लिए उलटा दांव?

दिलचस्प यह है कि कांग्रेस इन दिनों प्रदेश में जल, जंगल और जमीन के मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है। लेकिन यदि NR इस्पात जैसे औद्योगिक मामले में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल की अनियमितताएं सामने आती हैं, तो यही मुद्दा कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से भारी पड़ सकता है।

फिलहाल, NR इस्पात को दी गई जमीन और निवेश का मामला विधानसभा से निकलकर प्रशासनिक और राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। अब सभी की निगाहें विभागीय जवाब और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

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