Friday, August 28, 2026
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एक मंच, कई चेहरे और बड़ा सियासी संदेश रायगढ़ कांग्रेस में फिर दिखा ‘गुप्ता फैक्टर’ …..कृष्ण कुमार गुप्ता की 82वीं जयंती पर जुटे कांग्रेस के दिग्गज… अरुण गुप्ता के आयोजन ने 2028 की संभावित दावेदारी को दी नई हवा

 

 

रायगढ़। रायगढ़ की राजनीति में कुछ नाम केवल चुनावी आंकड़े नहीं होते, बल्कि वे एक लंबे राजनीतिक दौर की पहचान बन जाते हैं। कृष्ण कुमार गुप्ता भी ऐसा ही एक नाम हैं। लंबे समय तक रायगढ़ विधानसभा का प्रतिनिधित्व करने और मंत्री की जिम्मेदारी संभालने वाले गुप्ता की राजनीतिक विरासत अब एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह हैं उनके पुत्र अरुण गुप्ता और उनके द्वारा आयोजित पिता का 82वां जन्मदिन समारोह।

कार्यक्रम भले ही जन्मदिन के अवसर पर आयोजित किया गया था, लेकिन इसमें जिस तरह कांग्रेस के अलग-अलग धड़ों और पीढ़ियों के नेता एक मंच पर नजर आए, उसने इसे रायगढ़ की राजनीति का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम बना दिया।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, पूर्व मंत्री उमेश पटेल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता नोबेल वर्मा, धर्मजयगढ़ विधायक लालजीत सिंह राठिया, बिलाईगढ़ विधायक कविता प्राण लहरें, सारंगढ़ विधायक उत्तरी गनपत जांगड़े, चंद्रपुर विधायक रामकुमार यादव सहित कई नेताओं और कांग्रेस के स्थानीय पदाधिकारियों-कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने आयोजन को खास बना दिया।

सिर्फ जन्मदिन नहीं, कांग्रेस की एक तस्वीर भी दिखी

रायगढ़ कांग्रेस की राजनीति में गुटबाजी कोई अनजाना विषय नहीं है। ऐसे में अलग-अलग खेमों से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं का एक ही मंच पर दिखाई देना अपने आप में चर्चा का विषय रहा।

स्थानीय कांग्रेसियों के बीच इस बात की चर्चा रही कि लंबे समय बाद ऐसा अवसर आया, जब पार्टी के अलग-अलग चेहरे एक साथ दिखाई दिए। यही वजह है कि अरुण गुप्ता के आयोजन को केवल पारिवारिक कार्यक्रम के बजाय संगठन के भीतर उनकी स्वीकार्यता और संपर्क का प्रदर्शन भी माना जा रहा है।

राजनीति में भीड़ से ज्यादा महत्वपूर्ण अक्सर यह होता है कि भीड़ में कौन-कौन शामिल है। इस लिहाज से कार्यक्रम में प्रदेश और संभाग स्तर के नेताओं की मौजूदगी ने इसके राजनीतिक महत्व को बढ़ा दिया।

अरुण गुप्ता के लिए आयोजन क्यों महत्वपूर्ण?

अरुण गुप्ता पिछले कुछ वर्षों से कांग्रेस की सक्रिय राजनीति में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में रायगढ़ सीट के कांग्रेस वार रूम की जिम्मेदारी मिलने से लेकर लगातार संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी सक्रियता तक, उनकी राजनीतिक यात्रा अब पारिवारिक पहचान से आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।

इस आयोजन ने इसी यात्रा को एक नया राजनीतिक मंच दिया।

कांग्रेस के बड़े नेताओं की मौजूदगी के बीच अरुण गुप्ता ने एक तरह से यह संदेश देने की कोशिश की कि वे केवल पूर्व मंत्री कृष्ण कुमार गुप्ता के पुत्र के रूप में नहीं, बल्कि कांग्रेस की वर्तमान राजनीति में भी अपनी स्वतंत्र जगह बनाने की स्थिति में हैं।

2028 की टिकट पर अभी से चर्चा क्यों?

विधानसभा चुनाव 2028 में होने हैं और फिलहाल टिकट की दौड़ को लेकर कोई अंतिम तस्वीर नहीं है। लेकिन राजनीति में दावेदारी कई बार चुनाव की घोषणा के बाद नहीं, बल्कि उससे काफी पहले जमीन पर बननी शुरू हो जाती है।

अरुण गुप्ता का यह आयोजन इसी नजरिए से देखा जा रहा है।

गुप्ता परिवार की सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी उसकी पुरानी पकड़ है। कृष्ण कुमार गुप्ता ने रायगढ़ की राजनीति में लंबा दौर देखा और पांच बार विधायक रहने के साथ मंत्री पद भी संभाला। ऐसे में उनके परिवार की राजनीतिक पहचान आज भी रायगढ़ में मौजूद है।

अब सवाल यह है कि क्या अरुण गुप्ता इस विरासत को वोट में बदलने वाली अपनी राजनीतिक ताकत में बदल पाएंगे?

ओपी चौधरी के सामने कांग्रेस को तलाशना होगा मजबूत चेहरा

रायगढ़ विधानसभा में भाजपा के मजबूत राजनीतिक चेहरे और प्रदेश सरकार में मंत्री ओपी चौधरी के सामने 2028 में कांग्रेस के लिए चुनौती आसान नहीं होगी। ऐसे में कांग्रेस के लिए उम्मीदवार का चयन बेहद महत्वपूर्ण होगा।

पार्टी को ऐसा चेहरा चाहिए होगा, जो केवल संगठन के भीतर स्वीकार्य न हो, बल्कि भाजपा के मजबूत चुनावी ढांचे का मुकाबला करने के लिए जनता के बीच भी पर्याप्त प्रभाव रखता हो।

यहीं से अरुण गुप्ता की संभावित दावेदारी की चर्चा महत्वपूर्ण हो जाती है।

उनके पास राजनीतिक विरासत, कांग्रेस के भीतर पुराने संबंध और संगठनात्मक सक्रियता—तीनों मौजूद हैं। अब उनकी अगली परीक्षा यह होगी कि वह इन तीनों को जमीन पर सक्रिय जनसमर्थन में कितना बदल पाते हैं।

लेकिन राह इतनी आसान भी नहीं

अरुण गुप्ता के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि केवल पिता की राजनीतिक विरासत 2028 में पर्याप्त नहीं होगी। कांग्रेस के भीतर अन्य दावेदार भी होंगे और टिकट का फैसला संगठनात्मक समीकरण, सर्वे, स्थानीय सामाजिक समीकरण और उम्मीदवार की जीतने की क्षमता जैसे कई कारकों से तय होगा।

इसके अलावा अगले दो वर्षों में रायगढ़ की राजनीति में कई नए समीकरण बन सकते हैं।

इसलिए इस आयोजन को टिकट की घोषणा या अंतिम दावेदारी मानना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना जरूर है कि अरुण गुप्ता ने अपनी राजनीतिक मौजूदगी का एक बड़ा संकेत दे दिया है।

गुप्ता परिवार की राजनीति का अगला अध्याय?

कृष्ण कुमार गुप्ता का राजनीतिक दौर रायगढ़ में एक अलग युग की पहचान रहा है। अब उसी विरासत को अगली पीढ़ी किस रूप में आगे बढ़ाती है, यह देखने वाली बात होगी।

अरुण गुप्ता के आयोजन ने कम से कम इतना साफ कर दिया है कि गुप्ता परिवार की राजनीतिक विरासत अभी पूरी तरह अतीत का हिस्सा नहीं बनी है।

अगर आने वाले दो वर्षों में अरुण गुप्ता क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ाते हैं, कांग्रेस के अलग-अलग समूहों को साथ रखने में सफल होते हैं और अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक पहचान को मजबूत करते हैं, तो 2028 में रायगढ़ विधानसभा की टिकट की दौड़ में उनका नाम गंभीरता से लिया जाना स्वाभाविक होगा।

फिलहाल जन्मदिन के मंच से निकला सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यही है—रायगढ़ कांग्रेस में ‘गुप्ता फैक्टर’ फिर से चर्चा में है और 2028 की लड़ाई शुरू होने से काफी पहले अरुण गुप्ता ने अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है।

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