Monday, October 12, 2026
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छूटे हुए मकानों के सर्वे एवं मुआवजे की मांग को लेकर प्रभावित परिवारों ने कलेक्टर से लगाई गुहार…व्यक्तिगत तथा सामूहिक रूप से आवेदन प्रस्तुत किए लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं

 

 

घरघोड़ा – ग्राम बरौद के एसईसीएल बरौद खुली खदान विस्तार परियोजना से प्रभावित ऐसे परिवार, जिनके वास्तविक आवश्यकता के अनुसार निर्मित मकान आज भी सर्वे एवं मुआवजे से वंचित हैं, उन्होंने जिला प्रशासन से न्याय की मांग करते हुए 60 परिवारों ने कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन प्रस्तुत किया । प्रभावित परिवारों ने मांग की है कि उनके छूटे हुए मकानों का पुनः सर्वे कराकर एसईसीएल प्रबंधन से पात्रतानुसार मुआवजा लाभ प्रदान किया जाए।

प्रभावितों का कहना है कि बरौद खुली खदान विस्तार परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के बाद निजी भूमि एवं मकानों का मुआवजा भुगतान किया गया, लेकिन मुआवजा मूल्यांकन एवं प्रक्रिया पूर्ण होने में एक से दो वर्ष का समय लग गया। इसी अवधि में कई परिवारों ने अपने बढ़ते परिवार एवं वास्तविक आवश्यकता को देखते हुए रहने के लिए छोटे-छोटे मकानों का निर्माण किया। इन मकानों का निर्माण किसी प्रकार का अतिरिक्त मुआवजा प्राप्त करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि पारिवारिक आवश्यकता के कारण किया गया था।
ग्रामीणों का आरोप है कि आवश्यकता के अनुसार निर्मित इन मकानों का सर्वे नहीं होने से आज तक उन्हें मुआवजा ना मिल सका । इस संबंध में प्रभावित परिवारों ने कई बार एसईसीएल प्रबंधन एवं जिला प्रशासन के समक्ष व्यक्तिगत तथा सामूहिक रूप से आवेदन प्रस्तुत किए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
प्रभावित परिवारों ने यह भी बताया कि कार्यालय तहसीलदार, घरघोड़ा द्वारा वर्ष 2021 में मकानों एवं परिवारों का पुनः सर्वे कराने के लिए संयुक्त टीम गठित करने का आदेश जारी किया गया था। इसके बावजूद सर्वे कार्य पूर्ण नहीं हो सका और बीच में ही रोक दिया गया। इससे अनेक पात्र परिवार आज भी मकान मुआवजा पुनर्वास योजना के लाभ से वंचित हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अब गांव लगभग पूर्ण रूप से विस्थापन की स्थिति में पहुंच चुका है, इसलिए प्रशासन को इस लंबे समय से लंबित समस्या का शीघ्र समाधान करना चाहिए। उन्होंने जिला कलेक्टर से मांग की है कि छूटे हुए एवं आवश्यकता के अनुसार निर्मित मकानों का निष्पक्ष सर्वे कराकर पात्र परिवारों को नियमानुसार मुआवजा एवं पुनर्वास का लाभ दिलाया जाए। प्रभावित परिवारों ने उम्मीद जताई है कि जिला प्रशासन उनकी वर्षों पुरानी न्यायोचित मांग पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक कार्रवाई करेगा।

ग्रामीणों ने आगे की रणनीति तैयार करते हुऐ बताया की अब भी हमारी समस्या को गंभीरता से नही लिया गया तो उच्च न्यायालय बिलासपुर (छ.ग.) में जनहित याचिका दायर करने पर मजबूर होंगे।

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