Tuesday, October 13, 2026
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अपने गांव के स्कूल से सपनों की उड़ान कायतपाली के बच्चों ने नवोदय और एकलव्य में बनाई जगह…दुर्ग के एसडीओपी यदुमणि सिदार के प्रयासों से मजबूत हो रही उनके गांव के शिक्षा की नींव.. स्मार्ट एक्स्ट्रा क्लास के जरिए बच्चों को मिल रही अतिरिक्त शैक्षणिक सुविधा

 

 

बसना। किसी गांव के सरकारी स्कूल से निकलकर बड़े शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचना सिर्फ एक बच्चे की सफलता नहीं, बल्कि पूरे गांव और उस स्कूल के लिए गर्व का विषय होता है। शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय कायतपाली, विकासखंड बसना, जिला महासमुंद के बच्चों ने अपनी मेहनत और लगन से इसी सपने को साकार करना शुरू कर दिया है। खास बात यह है कि इस बदलाव की पहल उसी स्कूल से पढ़कर निकले और वर्तमान में दुर्ग में एसडीओपी के पद पर सेवाएं दे रहे यदुमणि सिदार के प्रयासों से लगातार आगे बढ़ रही है।

एसडीओपी यदुमणि सिदार ने अपने गृह ग्राम कायतपाली के बच्चों की शिक्षा की नींव मजबूत करने के उद्देश्य से ‘द हमागुड़ी एक्स्ट्रा क्लास’ के माध्यम से अतिरिक्त कक्षाओं की व्यवस्था शुरू की। इसके साथ ही बच्चों को आधुनिक तरीके से पढ़ाई का बेहतर माहौल देने के लिए स्मार्ट क्लास की व्यवस्था भी कराई गई। इसका सकारात्मक असर अब बच्चों के शैक्षणिक प्रदर्शन में दिखाई देने लगा है।

बच्चों के प्रेरणाश्रोत एसडीओपी यदुमणि सिदार

विद्यालय के बच्चों ने जवाहर नवोदय विद्यालय और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में प्रवेश हासिल कर गांव के सरकारी स्कूल की क्षमता और प्रतिभा का परिचय दिया है। इस वर्ष भी विद्यालय की छात्राओं कु. हर्षिता सिदार और कु. कुसुम सिदार का एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में चयन होना पूरे गांव के लिए गौरव की बात है। इससे पहले भी कायतपाली स्कूल के विद्यार्थियों ने नवोदय, एकलव्य और प्रयास आवासीय विद्यालय जैसी संस्थाओं में प्रवेश प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।

जिस स्कूल से सीखा ‘क ख ग’, उसी स्कूल के बच्चों को दे रहे उड़ान/-

एसडीओपी यदुमणि सिदार का इस विद्यालय से भावनात्मक जुड़ाव भी इस पहल की सबसे बड़ी ताकत है। वे कहते हैं कि कायतपाली वही गांव है, जहां उन्होंने जन्म लिया, प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की, उंगली पकड़कर लिखना सीखा, ‘क ख ग घ’ से परिचित हुए और अपने भविष्य के सपने देखे।

उनका कहना है कि जिस स्कूल से मैंने अपने सपनों की शुरुआत की, वहां की नई पीढ़ी के सपनों को उड़ान देने का छोटा-सा प्रयास हमेशा जारी रहेगा। गांव की मिट्टी से मिली मेरी पहली सीख आज भी मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।

वे नियमित रूप से अपने गांव पहुंचकर बच्चों से संवाद करते हैं और पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद, अनुशासन, लक्ष्य निर्धारण तथा समसामयिक विषयों पर चर्चा कर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। बच्चों के भीतर आए सकारात्मक बदलाव को देखकर वे उत्साहित हैं।
यदुमणि सिदार का कहना है कि बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ उन्हें सही दिशा, बेहतर मार्गदर्शन और लगातार प्रोत्साहन देने की है। उनका प्रयास है कि गांव का कोई भी बच्चा केवल संसाधनों के अभाव में अपने सपनों से पीछे न रह जाए।

सफलता का सिलसिला जारी रखने का संकल्प/-

कायतपाली के सरकारी स्कूल की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि यदि प्रतिभावान बच्चों को सही मार्गदर्शन, अतिरिक्त अध्ययन और आधुनिक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे भी नवोदय, एकलव्य और प्रयास जैसे प्रतिष्ठित आवासीय विद्यालयों में अपनी जगह बना सकते हैं।
आज कायतपाली के बच्चों की सफलता केवल दो-चार विद्यार्थियों की उपलब्धि नहीं, बल्कि गांव की नई पीढ़ी के बदलते आत्मविश्वास और मजबूत होते सपनों की कहानी है। जिस मिट्टी ने यदुमणि सिदार को आगे बढ़ने की पहली सीख दी, उसी मिट्टी के बच्चों के सपनों को अब वे अपने प्रयासों से नई उड़ान देने में जुटे हैं।

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