Friday, August 28, 2026
Homeआम मुद्देबस इस बात का डर है और इसी अस्मिता और अस्तित्व को...

बस इस बात का डर है और इसी अस्मिता और अस्तित्व को बचाने आदिवासी लड़ रहे हैं …..और इतिहास गवाह है कि गिनती के आदिवासियों ने जुल्म वो सितम वाली अंग्रेजों की हुकूमत से लोहा लेकर …..

 

 

 

तमनार में कोल ब्लॉक के विरोध में ग्रामीणों का धरना प्रदर्शन अनवरत जारी है। आदिवासी अब यहां अपनी अस्मिता और अस्तित्व को बचाने की जद्दोजहद अपनी बातों पर अडिग है और संपन्न हुई जन सुनवाई को एक सीरे से नकारते हुए जन सुनवाई निरस्त करने की मांग पर जमे हुए हैं। क्षेत्र के आदिवासियों को अब तक के कोल ब्लॉक के लिए जमीन देने के बाद कड़वा अनुभव है। उनके देवी देवता से लेकर परम्परा संस्कृति पर प्रहार हुआ है और जल जंगल जमीन की जगह धूल गुबार मिला है। अपनी जल जंगल जमीन बचाने के लिए मिले अधिकारों के बुते आदिवासियों का यह पूरा गांव का गांव अपनी मांगों को लेकर अनवरत बैठे हुआ है।

तमनार के आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के
साथी आलोक शुक्ला

और यह भी कि लगभग 25 साल पहले की जब इसी खदानों कल कारखानों की वजह से पर्यावरण के प्रति  जागरूकों का जत्था जल, जंगल और ज़मीन को बचाने के लिए सुबह से गांव गांव में जागरूकता अभियान के तहत निकलता था अब बीते वर्षों में इन प्रदूषण कारी राक्षसों ने अपने बाहों में पैदा होने वाले बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को समेट रखा है तो वो सभी भी इस बाहों से छूट कर भागने के लिए लड़ रहे हैं।

पहले इसी जिंदल की गारे पेलमा सेक्टर 1 कोल ब्लॉक जिसका लगातार विरोध हुआ तो जनसुनवाई स्थगित की गई पर इसी जिंदल की जनसुनवाई फिर से करवाने के लिए इतनी जल्दी पर्यावरण विभाग ने फाइल को फिर से दौड़ाया गया और तारीख मुकर्रर की गई तो जनता को एहसास हुआ कि उद्योगपतियों की चौखट में प्रजातंत्र की आवाज दब जा रही है। गौरतलब यह कि जन सुनवाई के पहले से ग्रामीण लगातार शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध प्रदर्शन करते चले आ रहे हैं। भले ही प्रशासन की नजर में असंवैधानिक होते हुए भी उनके साथ खड़े रहने की बात करता हो। बात यहां के आदिवासियों को डर अपने अस्तित्व का ही है जिसे बचाने वो जिद पर अड़े हैं। और ग्रामीणों का यह विरोध कोई सामान्य विरोध नहीं माना जा सकता।


यूं ही जन समुदाय अपना सब कुछ छोड़कर अपने अस्तित्व को बचाने सर्द मौसम में भी डटा हवा है। कोयला खदान के लिए हुई जन सुनवाई का लगातार ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शन के इतर चंद लोगों के बयानात को दर्ज कर जन सुनवाई की प्रक्रिया को पूरा करा देना,
ऐसे दमनकारी नीति के खिलाफ जब जब जन आंदोलनों को कुवलने दबाने का प्रयास किया गया है इतिहास गवाह इसके परिणाम स्वरूप घातक ही साबित हुए हैं। यहां इसका तात्पर्य यह कतई नहीं है कि पुलिस प्रशासन प्रदर्शन में बैठे ग्रामीणों के साथ जुल्म वो सितम कर रही है। सितम इस बात का है कि आदिवासियों और उनकी परम्परा अस्तित्व को बचाए रखने के लिए संवैधानिक अधिकार अनुसूची 5 के तहत पेशा कानून का अधिकार प्राप्त है और वे इस प्राप्त अधिकार के तहत प्रशासनिक तंत्र से अपना अधिकार मांग रहे हैं। और जन सुनवाई को निरस्त करने की मांग पर अड़े हुए है जो उन्हें नहीं मिल रहा है।

धरना स्थल पर प्रदर्शनकारी ग्रामीणों के साथ पुलिस प्रशासन का सौहार्द्य

पिछले दिनों की जनसुनवाई के दौर में अदानी के पुरंगा की कोयला खदान की जनसुनवाई स्थगित होना आदिवासियों की लड़ाई से रुकना दिखा और जिले के नागरिकों को लगा कि एकजुट होने से ऐसा हो सकता है। आज इन आदिवासी ग्रामीणों के अस्तित्व की लड़ाई में रोज जन प्रतिनिधियों और अन्य जन संगठनों और जनसमर्थन निरंतर बढ़ रहा है। जिसके वे हकदार हैं परन्तु इतिहास गवाह है कि गिनती के आदिवासियों ने जुल्म वो सितम वाली अंग्रेजों की हुकूमत से लोहा लेकर नाकों चने चबवा हुए हुकूमत को हिला दिया था। यहां तो पूरा गांव का गांव हज़ारों की संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी, जिसमे महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय है। पुरुंगा और तमनार के 14 गांव के ग्रामीणों का यह जन आंदोलन जो मूलतः आदिवासियों का है। और आदिवासियों के जन आंदोलन इतिहास में भी दर्ज है।

तमनार के कोयला खदान प्रभावित क्षेत्र के साथ पुरुंगा कोयला खदान के विरोध में यहां के आदिवासियों का खदान के विरोध में खड़े होने को हल्के में जरा भी कमतर आंकना गलत होगा। विरोध की आग तमनार के गारे पेलमा सेक्टर 1 कोयला खदान के विरोध में आदिवासी ग्रामीणों का जन आंदोलन के तौर पर चर्चित है, ये जन आंदोलन बता रहे हैं कि अब बहुत हो चुका औद्योगिक प्रदूषण और विकास के नाम पर विनाश का। आदिवासी भी इसे प्राथमिकता में मान कर अपने आने वाली पीढ़ी के लिए अपना जल जंगल जमीन को सुरक्षित रखने के लिए बस लड़ रहें हैं।

 

RELATED ARTICLES

30,000 टन सालाना उत्पादन क्षमता वाला संयंत्र 100% हरित ऊर्जा से संचालित होगा…वायर एवं केबल, पॉलिमर इंसुलेटर, थर्मल इंसुलेशन और ईवी क्षेत्र की बढ़ती...

  बेलगावी। आदित्य बिड़ला समूह की प्रमुख धातु कंपनी हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने कर्नाटक के बेलगावी में देश का पहला सुपरफाइन PPT ATH (Precipitated Aluminium...

मेगा हेल्थ कैंप एवं रक्तदान कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न, बड़ी संख्या में लोगों ने उठाया स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ… अतिथियों ने कहा इस तरह के...

    रायगढ़। पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के विलादत दिवस जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर ऑल मुस्लिम वेलफेयर फाउंडेशन, रायगढ़ एवं जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी कमेटी,...

राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित होंगी छत्तीसगढ़ से जिले की शिक्षिका सुनीता यादव ….छत्तीसगढ़ से एक मात्र इसलिए हुआ चयन …

  सारंगढ़ बिलाईगढ़/ राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान 2026 के लिए सारंगढ़- बिलाईगढ़ जिले की शिक्षिका सुनीता यादव का छत्तीसगढ़ से एकमात्र चयन किया गया है। उन्हें शिक्षक...

देश की 22 प्रतिशत यादव आबादी का बंटवारा मंजूर नहीं- यादव महासभा….कलेक्टर से मुलाकात कर कॉलम एक करने की मांग… कहा अंग्रेजों ने साज़िश...

      रायगढ़। छत्तीसगढ़ यादव महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने  कलेक्टर से मुलाकात कर आगामी जाति जनगणना में यादव समाज की विभिन्न उपजातियों को अलग अलग दर्ज...
- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments