Sunday, August 30, 2026
Homeआम मुद्देपेल्मा कोल माइंस मुआवजे में भेदभाव और पुनर्वास नीति को लेकर ग्रामीणों...

पेल्मा कोल माइंस मुआवजे में भेदभाव और पुनर्वास नीति को लेकर ग्रामीणों ने खोला मोर्चा….मांगे पूरी नहीं तो जनसुनवाई रद्द  …. कलेक्टर के नाम सौंपा ज्ञापन.. मांगे पूरी न होने पर धारा 144 का उल्लंघन कर उग्र आंदोलन और धरने की दी चेतावनी

 

 

रायगढ़
पेल्मा कोल माइंस परियोजना से प्रभावित ग्रामों के ग्रामीणों ने मुआवजे की विसंगतियों और पुनर्वास नीति को लेकर प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। ग्राम हिंझर, जरीडीह सहित अन्य प्रभावित गांवों के निवासियों ने सोमवार को जिला कलेक्टर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर आगामी 19 मई को होने वाली जनसुनवाई को तत्काल प्रभाव से स्थगित या रद्द करने की मांग की है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी बुनियादी मांगें पूरी नहीं होती, वे किसी भी सरकारी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनेंगे।

ग्रामीणों ने ज्ञापन में मुख्य रूप से प्रमुख मांगें/-

ग्रामीणों का आरोप है कि मुआवजे की दरों में असमानता क्यों, जबकि सम्पूर्ण भूमि एक ही परियोजना के लिए ली जा रही है। पेल्मा, उरबा, हिंझर, जरीडीह, लालपुर, मडवाडूमर, सकता और मिलुपारा जैसे गांवों के लिए ‘सर्किल रेट’ अलग-अलग तय किए गए हैं। जबकि इन सभी गांवों की भूमि एक ही परियोजना SECL के लिए अधिग्रहित की जा रही है। ग्रामीणों की मांग है कि खार भूमि, दो फसली भूमि और बहरा भूमि के लिए एक समान और न्यायसंगत दर पर मुआवजा दिया जाए।

नौकरी और पुनर्वास की स्पष्ट नीति:

प्रभावित परिवारों के सदस्यों को परियोजना के तहत नौकरी प्रदान करने या उसके बदले उचित धनराशि देने की स्पष्ट नीति लागू करने की मांग की गई है।

भूमि के बदले भूमि की मांग

चूंकि ग्रामीणों का संपूर्ण जीवन और आजीविका खेती-किसानी पर आधारित है, इसलिए उन्होंने मांग की है कि अधिग्रहित भूमि के बदले उन्हें अन्य शासकीय भूमि या वैकल्पिक कृषि भूमि प्रदान की जाए।

प्रशासन को सीधी चेतावनी

ग्रामीणों ने आवेदन में कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि वे अपनी भूमि देने के इच्छुक नहीं हैं और न ही उन्होंने इसके लिए सहमति दी है। ज्ञापन में कहा गया है कि
यदि शासन द्वारा हमारी मांगों पर विचार किए बिना जबरन भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई की जाती है, तो हम समस्त ग्रामवासी एकजुट होकर धारा 144 का उल्लंघन करते हुए आपके समक्ष धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी स्वयं प्रशासन की होगी।

अन्यथा जनसुनवाई का विरोध

आगामी 19 मई 2026 को प्रस्तावित जनसुनवाई का विरोध करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि जब तक पूर्व में दिए गए आवेदनों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक इस सुनवाई का कोई औचित्य नहीं है। यदि उनकी मांगें मान ली जाती हैं, तभी वे जनसुनवाई में सहयोग करेंगे।
कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपने के दौरान ग्राम पंचायत हिंझर की सरपंच श्रीमती अमरीका सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण जैसे शौकीलाल, मयराम, चंद्रशेखर, कैलाश, आनंदराम, नत्थूराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन सौंपा गया है। अब देखना यह है कि प्रशासन ग्रामीणों के इस अल्टीमेटम पर क्या रुख अपनाता है।

RELATED ARTICLES

30,000 टन सालाना उत्पादन क्षमता वाला संयंत्र 100% हरित ऊर्जा से संचालित होगा…वायर एवं केबल, पॉलिमर इंसुलेटर, थर्मल इंसुलेशन और ईवी क्षेत्र की बढ़ती...

  बेलगावी। आदित्य बिड़ला समूह की प्रमुख धातु कंपनी हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने कर्नाटक के बेलगावी में देश का पहला सुपरफाइन PPT ATH (Precipitated Aluminium...

मेगा हेल्थ कैंप एवं रक्तदान कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न, बड़ी संख्या में लोगों ने उठाया स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ… अतिथियों ने कहा इस तरह के...

    रायगढ़। पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के विलादत दिवस जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर ऑल मुस्लिम वेलफेयर फाउंडेशन, रायगढ़ एवं जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी कमेटी,...

राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित होंगी छत्तीसगढ़ से जिले की शिक्षिका सुनीता यादव ….छत्तीसगढ़ से एक मात्र इसलिए हुआ चयन …

  सारंगढ़ बिलाईगढ़/ राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान 2026 के लिए सारंगढ़- बिलाईगढ़ जिले की शिक्षिका सुनीता यादव का छत्तीसगढ़ से एकमात्र चयन किया गया है। उन्हें शिक्षक...

देश की 22 प्रतिशत यादव आबादी का बंटवारा मंजूर नहीं- यादव महासभा….कलेक्टर से मुलाकात कर कॉलम एक करने की मांग… कहा अंग्रेजों ने साज़िश...

      रायगढ़। छत्तीसगढ़ यादव महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने  कलेक्टर से मुलाकात कर आगामी जाति जनगणना में यादव समाज की विभिन्न उपजातियों को अलग अलग दर्ज...
- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments