Tuesday, October 13, 2026
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बिना पूर्ण व्यवस्थापन बुनियादी सुविधाएं नष्ट करने की तैयारी में SECL भड़के बरौद के ग्रामीण…..कलेक्टर और एसडीएम को सौंपा ज्ञापन… ग्राम सभा ने प्रस्ताव पारित कर कहा जब तक आखिरी ग्रामीण मौजूद है..तब तक न छुएं स्कूल, अस्पताल और पंचायत भवन

 

 

घरघोड़ा (रायगढ़)।
रायगढ़ जिले के घरघोड़ा तहसील अंतर्गत आने वाले ग्राम बरौद में एसईसीएल की खुली खदान परियोजना को लेकर प्रभावित ग्रामीणों का आक्रोश सातवें आसमान पर है। विस्थापितों का आरोप है कि एसईसीएल प्रबंधन बिना पूर्ण और व्यवस्थित पुनर्वास किए ही गांव की दशकों पुरानी शासकीय मूलभूत सुविधाओं को आनन-फानन में नष्ट करने का प्रयास कर रहा है। प्रबंधन की इस जल्दबाजी के खिलाफ ग्रामीणों ने लामबंद होकर मोर्चा खोल दिया है।

ग्राम पंचायत बरौद की ग्राम सभा बैठक (प्रस्ताव क्रमांक 06, दिनांक 17.04.2026) में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से एक कड़ा प्रस्ताव पारित किया है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जब तक गांव के लोग वर्तमान जगह पर रह रहे हैं और सुविधाओं का उपयोग कर रहे हैं, तब तक उन्हें पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए। ग्रामीणों ने यह मांग भी रखी है कि ग्राम सभा की कम से कम 70% लिखित सहमति के बिना गांव की किसी भी मूलभूत संरचना को कोई नुकसान न पहुँचाया जाए।

कलेक्टर और एसडीएम से गुहार/-
ग्रामीणों ने इस गंभीर विषय को लेकर 25 मई 2026 को जिला कलेक्टर और अनुविभागीय अधिकारी घरघोड़ा को एक औपचारिक पत्र सौंपा है। इस पत्र में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि एसईसीएल प्रबंधन वर्तमान कोयला उत्पादन प्रोजेक्ट का हवाला देकर गांव की अनिवार्य बुनियादी सुविधाओं जैसे पूर्व माध्यमिक और प्राथमिक शाला भवन, आंगनबाड़ी केंद्र और अस्पताल भवन, ग्राम पंचायत कार्यालय और राजीव गांधी भवन,
उचित मूल्य की दुकान, सांस्कृतिक मंच, पक्की सड़कें, चौक-चौराहे और अन्य शासकीय परिसंपत्तियां जिसे SECL प्रबंधन हड़बड़ी में तोड़ने या अधिग्रहित करने की कोशिश कर रहा है, जो कि पूरी तरह से गलत और अमानवीय है।

मांग पहले पूरा पुनर्वास, फिर होगा कब्जा/-
प्रभावित विस्थापितों का कहना है कि जब तक एक-एक परिवार का सही तरीके से पूर्ण व्यवस्थापन नहीं हो जाता, तब तक पुराने गांव की बिजली, पानी, सड़क, स्कूल और अस्पताल जैसी जीवनदायिनी सुविधाओं को नष्ट करना उनके मौलिक अधिकारों का हनन है। बच्चों की पढ़ाई और मरीजों के इलाज को बीच में रोककर खदान विस्तार करना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने इस पत्र की प्रतियां राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (नई दिल्ली), केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, खान सुरक्षा महानिदेशालय (धनबाद) और जिला प्रशासन के आला अधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी हैं, ताकि एसईसीएल की इस मनमानी पर तुरंत रोक लगाई जा सके।

 

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