रायगढ़। कोयले की खुदाई, जंगलों की कटाई और पानी के अंधाधुंध दोहन का दंश झेल रहे रायगढ़ में अब बिजली दरों में प्रस्तावित बढ़ोतरी ने आक्रोश को और भड़का दिया है। आज 18 फरवरी को रायगढ़ में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा आयोजित जन सुनवाई में टैरिफ वृद्धि का मुद्दा गरमाने वाला है। शहर के जागरूक नागरिक, व्यापारी संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न जनसंगठन बड़ी संख्या में पहुंचकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराने की तैयारी में हैं।
विरोध करने वालों का सीधा सवाल है—जब बिजली उत्पादन के लिए रायगढ़ की धरती से कोयला निकाला जा रहा है, जल स्रोतों का दोहन हो रहा है और जंगलों को उजाड़ा जा रहा है, तब उसी शहर के लोगों को महंगी बिजली क्यों? प्रदूषण, धूल और बीमारियों का बोझ उठाने के बाद अब बढ़ी हुई बिजली दरें आम जनता की कमर तोड़ने वाली साबित होंगी।
सूत्रों के अनुसार कई संगठनों ने जन सुनवाई को लेकर रणनीति तैयार की है। ज्ञापन, सामूहिक आपत्ति और तथ्यात्मक प्रस्तुतियां देकर यह मांग उठाई जाएगी कि स्थानीय संसाधनों का उपयोग करने वाले उद्योगों और उत्पादन इकाइयों के बीच आम उपभोक्ता पर अतिरिक्त बोझ डालना न्यायसंगत नहीं है।
शहर में चर्चा है कि यह जन सुनवाई केवल औप- – चारिकता न बन जाए बल्कि जनता की आवाज को गंभीरता से सुना जाए। जो कि 600 यूनिट बिजली मुफ्त मिलने को आमादा है कि सरकारी दबाव से टैरिफ बढ़ोतरी के फैसले पर मुहर लगेगी ? अब देखना यह होगा कि रायगढ़ की जनता की एकजुट आवाज टैरिफ बढ़ोतरी के फैसले को कितना प्रभावित कर पाती है।

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