गरीब पर सख़्ती, कोचियों पर मेहरबानी? मिक्स धान का आरोप लगाकर अपंग किसान को उसके अधिकार से किया वंचित
पुसौर/ रायगढ़।
छत्तीसगढ़ की धान खरीदी व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पुसौर तहसील के ग्राम पंचायत मचिदा, पोस्ट पडीगांव निवासी बामदेव प्रधान (पिता–पालेश्वर प्रधान) जो कि दोनों पैरों से अपाहिज है के साथ धान पड़ीगांव मंडी में ऐसा व्यवहार किया गया जिसने पूरी व्यवस्था की संवेदनहीनता उजागर कर दी है। किसान को मजबूरी में अपनी फसल को बिना बेचे वापस घर लाने को मजबूर किया गया।

अपाहिज किसान बामदेव प्रधान अपनी मेहनत से उपजाई गई 22.22 क्विंटल (एक ट्रॉली) शिल्टी धान लेकर समिति पहुँचे थे। गिरदावरी के आधार पर उन्हें विधिवत टोकन भी जारी किया गया, लेकिन मंडी अधिकारियों ने धान को मिक्स और पुराना बताकर खरीदने से इंकार कर दिया।
किसान का कहना है कि हार्वेस्टर से कटाई के दौरान हल्का-फुल्का मिक्स होना स्वाभाविक है, क्योंकि मशीन से कई किस्में कटती हैं। इसके बावजूद अधिकारियों ने यह कहते हुए दबाव बनाया कि धान जप्त कर लिया जाएगा। एसडीएम स्तर से दबाव की बात कहकर किसान को डराया गया।

पड़ीगांव सेवा सहकारी समिति के प्रबंधक की तानाशाही रवैया डर और भय के माहौल में, अपनी मेहनत की कमाई जप्त हो जाने की आशंका से सहमे अपाहिज किसान को मजबूरन पूरा ट्रॉली धान बिना बेचे वापस घर ले जाना पड़ा।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक ही फसल वाले गरीब किसान के पास ‘पुराना धान’ आखिर आएगा कहां से?
कभी कहा जाता है धान पूरी तरह सुखाकर लाओ, और जब किसान सुखाकर लाता है तो कहा जाता है कि यह पुराना और मिक्स है। आखिर किसान करे तो क्या करे?
आरोप है कि इस तरह की सख्ती केवल कमजोर और गरीब किसानों पर ही लागू होती है, जबकि बड़े व्यापारियों और कोचियों के धान में न गुणवत्ता देखी जाती है, न मिक्स का सवाल उठता है।

टोकन जारी होने के बावजूद धान न खरीदा जाना न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि एक अपाहिज किसान के अधिकारों का खुला हनन भी है। इस पूरे घटनाक्रम में किसान की कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई।
अब सवाल यह है कि क्या धान खरीदी व्यवस्था गरीब और असहाय किसानों को डराने का औज़ार बन गई है
और क्या प्रशासन इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा या यह अन्याय भी फाइलों में दफन हो जाएगा।

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