Saturday, March 7, 2026
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अब चुप नहीं रहेगा लूटा रायगढ़ …प्रदूषण, बीमारी और हादसों से त्रस्त नागरिकों का ऐलान संसाधन हमारे हक भी हमारा….. 600 यूनिट मुफ्त बिजली की मांग को लेकर लोगों ने खोला मोर्चा ….संयुक्त हस्ताक्षर कर नागरिकों ने नियामक आयोग के समक्ष रखी मांग…. जल-जंगल-जमीन के दोहन पर उठे तीखे सवाल

 

 

 

रायगढ़। बिजली उत्पादन के नाम पर जिले की जमीन, जंगल और पानी लगातार खत्म हो रहे हैं, लेकिन बदले में स्थानीय लोगों को मिल रहा है प्रदूषण, बीमारियां और हादसों का डर। यही वजह है कि अब रायगढ़ के नागरिक खुलकर सामने आ गए हैं और 600 यूनिट मुफ्त बिजली को अपना हक बताते हुए इसे तत्काल लागू करने की मांग तेज कर दी है। लोगों का आरोप है कि जिस जिले की संपदा से बिजली कंपनियां अरबों-खरबों का लाभ कमा रही हैं, उसी जिले के लोग बुनियादी राहत के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं।

बिजली उत्पादन की कीमत अब रायगढ़ के लोग अपनी सेहत, जमीन और आने वाली पीढ़ियों से चुका रहे हैं और इसी के खिलाफ अब आवाज बुलंद होने लगी है। जिले के नागरिक खुलकर मैदान में उतर आए हैं और साफ शब्दों में कह दिया है कि जब जल-जंगल-जमीन रायगढ़ की है और मुनाफा कंपनियां कमा रही हैं, तो 600 यूनिट मुफ्त बिजली उनका हक है, एहसान नहीं। लोगों का कहना है कि अगर उनकी मांगों को अनसुना किया गया तो यह आवाज एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकती है।

 

रायगढ़ बचाओ-लड़ेंगे समूह के विनय शुक्ला, ऋषभ मिश्रा, सुरेंद्र पटेल, आदर्श श्रीवास, प्रीति केरकेट्टा, ईनाम सिद्दीकी, शेख रजॉल हसन, अभिषेक चौहान, सुनीता माइति, मुजीब अहमद, शिवम कच्छवाहा, नवीन शर्मा, राधा शर्मा, दिनेश टंडन, सौरभ साहू, योगेश चौहान, चिरंजीवी राय, अजय गायकवाड़, संजय देवांगन, अज्ञात मल्होत्रा, अनिल अग्रवाल चीकू, कामरेड कलीमुल्लाह वारसी सहित अनेक नागरिकों ने संयुक्त हस्ताक्षर कर राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष दावा-आपत्ति प्रस्तुत की। याचिका के माध्यम से सात प्रमुख बिंदुओं में जिले की समस्याएं और 600 यूनिट मुफ्त बिजली की मांग रखी गई। विद्युत नियामक आयोग के समक्ष स्थानीय लोगों के द्वारा टैरिफ न बढ़ाने और जिले वासियों को 600 यूनिट बिजली मुफ्त क्यों मिलनी चाहिए इस पर मजबूती के साथ अपना पक्ष रखा। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल की भी तैनाती की गई थी।

 

नागरिकों ने बताया कि बिजली उत्पादन करने वाले उद्योगों को प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध कराने के कारण भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है और लोग प्रदूषित तथा केमिकलयुक्त पानी पीने को मजबूर हैं। उद्योगों के धुएं और राख से वातावरण इतना दूषित हो चुका है कि पारंपरिक खाद्य सामग्री और कपड़े खुले में सुखाना तक मुश्किल हो गया है।

कोयला खदानों और भारी वाहनों के कारण जंगलों का विनाश, बढ़ता तापमान और सड़क दुर्घटनाओं में लगातार मौतें भी गंभीर चिंता का विषय बताई गई हैं। लोगों का कहना है कि प्रदूषण से अस्थमा, खांसी, आंखों की जलन, फेफड़ों की बीमारी और कैंसर जैसे रोग तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे इलाज का खर्च लाखों में पहुंच रहा है और आम परिवार आर्थिक रूप से टूट रहे हैं।
नागरिकों ने आरोप लगाया कि ऊर्जा विभाग और बिजली कंपनियों ने समय रहते प्रदूषण और जनहानि रोकने के लिए प्रभावी योजना नहीं बनाई, बल्कि महंगे बिजली बिल वसूली पर ज्यादा ध्यान दिया। उनका कहना है कि रायगढ़ ने अपनी जल-जंगल-जमीन देकर प्रदेश को ऊर्जा दी है, इसलिए 600 यूनिट मुफ्त बिजली देना कोई राहत नहीं बल्कि जिले के लोगों का न्यायोचित अधिकार है।

रायगढ़ बचाओ-लड़ेंगे समूह और बड़ी संख्या में नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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