रायगढ़ |
रायगढ़ जिले के ग्राम कलमा स्थित कलमा बैराज एक बार फिर अंतरराज्यीय जल विवाद के कारण चर्चा में है। उड़ीसा से पहुंचे महानदी बचाओ आंदोलन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने कलमा बैराज के नीचे अवैध रूप से बनाए गए बालू बांध के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों का आरोप है कि महानदी के उस प्राकृतिक प्रवाह को, जो उड़ीसा की ओर जाता है, रेत के जरिए रोक दिया गया है। इससे नदी का जल प्रवाह प्रभावित हो रहा है और उड़ीसा के हिस्से में पानी की कमी पैदा हो रही है।

आंदोलनकारियों ने कहा कि महानदी एक साझा प्राकृतिक संसाधन है, लेकिन छत्तीसगढ़ में पानी को कृत्रिम रूप से रोककर उसका दोहन किया जा रहा है। आरोप है कि इस पानी का उपयोग आम जनता के बजाय पूंजीपतियों और औद्योगिक घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। कलमा बैराज के नीचे पानी रोकने की प्रक्रिया को उन्होंने अवैध बताते हुए इसे तत्काल बंद करने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान रायगढ़ के जन चेतना मंच के संयोजक और सामाजिक कार्यकर्ता राजेश त्रिपाठी भी आंदोलनकारियों के समर्थन में सामने आए। उन्होंने कहा कि वर्तमान नीतियों में जल, जंगल और जमीन के साथ-साथ पानी का भी अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है। सरकार उद्योगपतियों के हित में काम कर रही है, जबकि आम जनता और पर्यावरण की अनदेखी हो रही है।
त्रिपाठी ने महानदी बचाओ आंदोलन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष करने की बात कही। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि अवैध रेत बांध नहीं हटाया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। फिलहाल, कलमा बैराज को लेकर उड़ीसा और छत्तीसगढ़ के बीच जल विवाद एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है।

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