पुसौर/रायगढ़।
धान मंडी में अपाहिज किसान के साथ हुए अमानवीय व्यवहार की खबर प्रकाशित होते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। पुसौर तहसील के ग्राम पंचायत मचिदा, पोस्ट पडीगांव निवासी अपाहिज किसान बामदेव प्रधान (पिता–पालेश्वर प्रधान) को पहले टोकन कटने के बावजूद धान बिक्री से रोका गया, मिक्स धान का आरोप लगाकर जप्त करने की धमकी दी गई और भयभीत किसान पूरा ट्रॉली धान वापस घर ले जाने को मजबूर हुआ।
मामला सार्वजनिक होते ही समिति और संबंधित अधिकारियों की नींद टूट गई। आनन-फानन में अधिकारी किसान के घर पहुंचे, समिति द्वारा आग्रह किया गया कि धान मंडी लाया जाए। इसके बाद वही धान, जिसे पहले “खराब” और “मिक्स” बताकर ठुकराया गया था, सम्मानपूर्वक खरीदा गया। यह घटनाक्रम साफ बताता है कि व्यवस्था में नियम नहीं, दबाव और प्रचार के बाद ही संवेदना जागती है।

धान की खरीदी होने पर अपाहिज किसान बामदेव प्रधान ने मीडिया का आभार जताया, लेकिन सवाल यथावत है कि क्या बिना खबर छपे यह न्याय मिलता?
क्या गरीब और अपंग किसान को अपने ही हक के लिए डराया जाना अब सामान्य हो चुका है?
यह मामला धान खरीदी व्यवस्था की दोहरी नीति को उजागर करता है।


गरीब किसान पर सख़्ती, और कोचियों पर आंख मूंदकर मेहरबानी। खबर प्रकाशित होने के बाद अपाहिज किसान का धान खरीदा गया, पर कल फिर किसी बामदेव को डराकर लौटाया न जाए, इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और स्पष्ट दिशा-निर्देश जरूरी हैं।

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