रायगढ़। गारे पेल्मा सेक्टर 2 के प्रभावित गांव की ग्रामीण महिलाओं ने बैठक कर फैसला लिया है कि जिस जल जंगल जमीन पर वो और उनके पूर्वजों से आजीविका कर जीवन यापन करते चले आ रहे हैं उसे किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे भले ही इसके लिए जान देनी पड़ी तो पीछे नहीं हटेंगे।
बुधवार को मुड़ागांव में आसपास की सैकड़ों महिलाएं एकत्रित होकर महाजेंको को आबंटित कोल ब्लाक गारे पेल्मा सेक्टर 2 के लिए जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देने का फैसला लिया गया। ग्रामीण महिलाएं इस दौरान अपनी वनोपज आधारित आजीविका में से एक ग्रामीण दोना पत्तल बनाते हुए बैठक किया। और कहा कि वे और उनके पूर्वज सालों से वनोपज आधारित आजीविका चलाकर जीवन यापन करते चले आ रहे हैं। महिलाएं कहती हैं की गांव के लोग वनों से मिलने वाली विभिन्न प्रकार के वनोपज चार, महुवा, डोरी आदि विभिन्न अलग अलग मौसमी आधारित वनोपज उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। शादी ब्याह में आज भी ग्रामीण क्षेत्र में दोना पत्तल का उपयोग किया जाता है। साल भर जंगल उन्हे कुछ न कुछ देते रहती है। बैठक में महिलाओं ने निर्णय लिया कि वे किसी भी कीमत पर कोयला खदान के लिए जमीन लेने नहीं देने देंगी।

महाजेंको को आबंटित कोयला खदान से कोयला उत्खनन के लिए एमडीओ कम्पनी द्वारा लगातार शाम दाम दण्ड भेद की नीति अपनाकर प्रयास कर रही है। इससे ग्रामीणों में लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है। पहले ही महाजेंको द्वारा फर्जी ग्राम सभा दस्तावेज के सहारे हरे भरे पेड़ों की भारी संख्या में कटाई कर दी गई है। लेकिन इन सबके बाद भी प्रभावित गांव के ग्रामीण हार मानने को तैयार नहीं है। गांव की कांति सिदार, सूरज राठिया, ललिता सिदार, रसमति भगत, सुखमेत सिदार, तरामती मांझी, हरिमती भगत ने कहा कि पेसा एक्ट कानून के तहत उन्हें ग्राम सभा का अधिकार प्राप्त है और हम अपने अधिकार के तहत किसी भी कीमत पर जमीन नहीं देंगे। इस दौरान ग्रामीण महिलाओं द्वारा जंगल से पत्ता लाकर दोना पत्तल बनाया।

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