रायगढ़:।
घरघोड़ा से तमनार तक बुधवार को निकले भाजपा के यूनिटी मार्च के दौरान बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया, जब कांग्रेस के फायरब्रांड युवा नेता रजनीकांत ने सैकड़ों समर्थकों के साथ भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर सबको चौंका दिया।
वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, सांसद राधेश्याम राठिया, जिला अध्यक्ष अरूणधर दीवान और वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में हुई यह घोषणा किसी सियासी धमाके से कम नहीं थी। माहौल नारों और तालियों से गूंज उठा, वहीं कांग्रेस खेमे में मायूसी पसर गई।
रजनीकांत ने कहा, अब युवाओं को नए भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभानी होगी।
उनके इस बयान ने क्षेत्र में नई राजनीतिक सरगर्मी पैदा कर दी है। स्थानीय विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने युवा नेतृत्व के जरिये कांग्रेस की एकता पर सीधा प्रहार किया है।
छात्र राजनीति से राष्ट्रीय पहचान तक
रजनीकांत की राजनीतिक यात्रा छात्रसंघ चुनाव से शुरू हुई, जब 2014 में उन्होंने सचिव पद पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। इसके बाद वे एनएसयूआई ब्लॉक अध्यक्ष, प्रदेश संयोजक और राष्ट्रीय संयोजक बने। संगठन में रहते हुए उन्होंने ओडिशा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में युवाओं को सक्रिय किया।
उनकी स्पष्ट सोच, तेजतर्रार व्यक्तित्व और जनसंपर्क क्षमता ने उन्हें युवा वर्ग का पसंदीदा नेता बना दिया। अब भाजपा में शामिल होकर उन्होंने न केवल दल बदला है, बल्कि राजनीति की नई परिभाषा गढ़ दी है।
‘रजनीकांत इफेक्ट’ से युवाओं में जोश
यूनिटी मार्च के बाद से क्षेत्र में “रजनीकांत इफेक्ट” की चर्चा हर ओर है। सोशल मीडिया से लेकर कॉलेज परिसरों तक, युवाओं में भाजपा को लेकर उत्साह बढ़ा है। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में कई युवा नेता भी भाजपा में शामिल हो सकते हैं।
रजनीकांत ने अपने निर्णय के पीछे वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी की कार्यशैली को प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा, ओ.पी. चौधरी जी ने युवाओं को मंच और अवसर देकर यह साबित किया है कि राजनीति बदलाव का माध्यम बन सकती है। अब मैं भाजपा के मंच से क्षेत्र के विकास में योगदान देना चाहता हूं।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, रजनीकांत का भाजपा में आना आने वाले चुनावों में सियासी समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है — और यूनिटी मार्च अब भाजपा के लिए “युवा विजय रथ” का प्रतीक बन गया है।

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